UP में करीब 1 प्रतिशत बढ़े मुस्लिम मतदाता, सत्यापन की तैयारी, नए बने मतदाताओं में 35% इनकी संख्या

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त्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मुस्लिम मतदाता 0.9 प्रतिशत बढ़ गए हैं। इतना ही नहीं, जो नए मतदाता बने हैं, उनमें 35 प्रतिशत मुस्लिम हैं। कई आयु वर्ग में आबादी के अनुपात से कहीं ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। उच्च स्तर पर चल रहे डाटा के गोपनीय विश्लेषण में यह तथ्य सामने आए हैं। इसके अलावा मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर कई अन्य तरह की गड़बड़ियां भी सामने आई हैं।

 

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल अल्पसंख्यक आबादी लगभग 20.3% है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 19.3 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय का है। इसके अलावा सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय शामिल हैं। चुनाव आयोग धार्मिक आधार पर मतदाताओं के आंकड़े जारी नहीं करता है। हालांकि, राजनीतिक और सामाजिक अध्ययनों के अनुमानों के मुताबिक, राज्य के कुल मतदाताओं में अल्पसंख्यक मतदाताओं की हिस्सेदारी उनकी आबादी के अनुपात में लगभग 19-20 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है।

 

 

आंकड़ों पर काम कर रहा पक्ष-विपक्ष

उत्तर प्रदेश में एसआईआर के बाद विधानसभा व लोकसभा क्षेत्रों के लिए अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को जारी की गई। तभी से इस सूची के आंकड़ों पर पक्ष-विपक्ष काम कर रहा है। ताकि, अपने पक्ष-विपक्ष के समीकरणों को समझ सके। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, एसआईआर से पहले यूपी में मुस्लिम मतदाता 18.6 प्रतिशत थे, जो अब बढ़कर 19.5 प्रतिशत हो गए हैं।

सत्ताधारी दल भाजपा के लिए सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि 18-21 आयु वर्ग के मतदाताओं में मुस्लिम मतदाताओं की आबादी 25 प्रतिशत दर्ज की गई है। 18-40 आयु वर्ग में मुस्लिम मतदाता 22 प्रतिशत हैं। फॉर्म-6 भरकर नए मतदाता बनने में भी मुस्लिम युवाओं ने गजब का उत्साह दिखाया है।

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एक से ज्यादा वोटर आईडी कार्ड भी पकड़ में आए

विश्लेषण में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता भी मिले हैं, जो यूपी के अलग-अलग जिलों में रह रहे हैं और उन्होंने अपने रिश्तों (माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी) की मैचिंग दूसरे राज्यों में रह रहे एक ही व्यक्ति से कराई है। एक ही परिवार के सदस्यों के दो अलग-अलग वोटर आईडी नंबर पर एक से ज्यादा वोटर आईडी कार्ड भी पकड़ में आए हैं।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, डाटा के इस विश्लेषण के नतीजों का जल्द ही आधिकारिक रूप से सत्यापन कराया जाएगा। ताकि, मतदाता सूची को दुरुस्त किया जा सके। दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा से दो बातें

सवाल : क्या उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत बढ़ा है?
जवाब : चुनाव आयोग धर्म के आधार का मतदाताओं का आंकड़ा नहीं रखता है।

सवाल : एक ही व्यक्ति के अलग-अलग एपिक नंबर पर मतदाता पहचान पत्र मिल रहे हैं?
जवाब : डुप्लीकेट मतदाता होने की शिकायतें मिली हैं, जांच की प्रक्रिया पूरी करने के
बाद ऐसे नाम मतदाता सूची से हटाने का काम ईआरओ के स्तर से किया जाता है।

सवाल : रिश्ते मैच कराने में भी गड़बड़ियां बताई जा रही हैं?
जवाब : शिकायत मिलने पर सत्यापन कराया जा सकता है।

सवाल : यह सत्यापन राज्य की एजेंसियां भी कर सकती हैं?
जवाब : हां, कई बार आईबी भी हमें रिपोर्ट देती है कि अमुख बांग्लादेशी (विदेशी) ने यहां अपना वोट बनवा लिया है। धोखाधड़ी के तथ्य सामने आने पर एजेंसियां अपने स्तर से भी संज्ञान ले सकती हैं।

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