महंत अवधेश दास एवं महंत मुन्ना दास के नेतृत्व में गोरक्षपीठ पहुंचे अयोध्या के संत, द्वारिका प्रसाद तिवारी से हुई महत्वपूर्ण भेंट

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श्रीराम जन्मभूमि की पावन नगरी अयोध्या से संतों का एक प्रतिनिधिमंडल श्री चारुशीला मंदिर के उत्तराधिकारी महंत अवधेश दास एवं पलटू दास अखाड़ा के उत्तराधिकारी महंत मुन्ना दास के नेतृत्व में गोरखपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध गोरक्षपीठ पहुंचा। संतों का यह दौरा आध्यात्मिक, धार्मिक एवं सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ महाराज से शिष्टाचार भेंट कर सनातन धर्म, समाज और राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करना था।
प्रतिनिधिमंडल में नेपाली बाबा (बिषभर दास), महंत शुभम दास जी महाराज सहित कई संत एवं धर्माचार्य शामिल रहे। गोरक्षपीठ पहुंचने पर संतों ने गुरु गोरखनाथ जी के चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित किए तथा मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन कर प्रदेश की खुशहाली, राष्ट्र की प्रगति और जनकल्याण की प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यस्तता के कारण उनसे प्रत्यक्ष भेंट नहीं हो सकी, लेकिन संतों ने गोरखनाथ मंदिर के प्रमुख व्यवस्थापक एवं मुख्यमंत्री के विश्वस्त सहयोगी द्वारिका प्रसाद तिवारी से शिष्टाचार मुलाकात की। यह मुलाकात अत्यंत सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुई।
मुलाकात के दौरान महंत अवधेश दास ने अयोध्या और गोरक्षपीठ के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों धार्मिक पीठें सनातन संस्कृति और राष्ट्र चेतना को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में संत समाज की जिम्मेदारी केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुंचाना भी है।
वहीं महंत मुन्ना दास ने कहा कि अयोध्या और गोरक्षपीठ सदियों से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रमुख केंद्र रहे हैं। संत समाज सदैव जनसेवा, धर्म रक्षा और समाज में समरसता स्थापित करने के लिए कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि देश के आध्यात्मिक केंद्रों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ने से समाज को नई दिशा मिलती है।
द्वारिका प्रसाद तिवारी ने अयोध्या से आए संतों का स्वागत करते हुए कहा कि गोरक्षपीठ सदैव संत परंपरा, धर्म रक्षा और जनकल्याण के कार्यों में अग्रणी रही है। उन्होंने गोरक्षपीठ द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, गौसेवा और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी संतों को दी। साथ ही अयोध्या और गोरक्षपीठ के बीच आत्मीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर बल दिया।
संतों ने गोरक्षपीठ की व्यवस्थाओं, अनुशासन और सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोरक्षपीठ आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ समाज सेवा का भी एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। संतों ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में अयोध्या और गोरक्षपीठ के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक सहयोग और अधिक सुदृढ़ होगा।
गोरक्षपीठ में प्रवास के दौरान संतों ने मंदिर परिसर का अवलोकन किया तथा वहां चल रही विभिन्न धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर दोनों पक्षों ने सनातन संस्कृति के संरक्षण, युवाओं में धार्मिक जागरूकता बढ़ाने तथा समाज में नैतिक मूल्यों के प्रसार के लिए मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अयोध्या से आए संतों के इस दौरे को धार्मिक जगत में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संतों का मानना है कि देश के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों के बीच इस प्रकार का संवाद सनातन संस्कृति को मजबूत करने और समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने का कार्य करता है।

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