राममंदिर के चंदे में चोरी- अचानक टिन्नू का सामने आना सामान्य नहीं, इसके पीछे बड़ी चाल, इन 3 पर सबसे अधिक सवाल

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श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में हेरफेर के मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का अचानक सामने आना और बयान देना कई सवाल खड़े करता है। प्रकरण में सर्वाधिक सवालों के घेरे में टिन्नू ही है। इतने दिनों से वह खामोश था, सोमवार को वीडियो बयान जारी किया और कई मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू भी दिए। इसके पीछे बड़े खेल की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के बचाव में उसे आगे किया गया है। वह बयानों में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पक्ष में बोला है, जबकि अन्य कई लोगों पर सवाल खड़े किए हैं, जो आशंका की ओर इशारा कर रहा है।

 

गबन का मामला छह जून को उजागर हुआ था। कुछ ही घंटों में इसने तूल पकड़ लिया था। इसके बाद से ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली थी। यहां तक कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, जो सामान्यतः कारसेवकपुरम में निवास करते हैं, वह भी तब से मंदिर परिसर स्थित ट्रस्ट कार्यालय में ही रह रहे हैं।
न कोई बयान जारी किया गया और न ही मीडिया से बातचीत की गई। कार्यालय तक पहुंचने वाले लोगों को भी वहां से लौटा दिया गया। ऐसे में करीब 10 दिन बाद सोमवार को टिन्नू का अचानक सामने आना, कई सवाल खड़े करता है। सूत्रों के मुताबिक, सोची-समझी रणनीति के तहत टिन्नू को आगे किया गया है।
राजनीतिक दल ने भी उकसाया
सूत्रों का कहना है कि एक राजनीतिक दल के कुछ पदाधिकारियों ने भी टिन्नू से संपर्क किया था। उन्हें बताया गया कि जिस तरह से मामला आगे बढ़ रहा है। उसमें पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर डाली जा सकती है। इसलिए उन्हें सामने आकर पक्ष रखना चाहिए। ट्रस्ट के एक करीबी पदाधिकारी ने भी उन्हें इसके लिए सहमति दी ताकि उनके पक्ष की बातें भी सामने रखी जा सकें और पूरा ठीकरा अन्य लोगों पर फूटता रहे।
दो पदाधिकारी व टिन्नू पर सर्वाधिक सवाल
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, टिन्नू और गोपाल राव सर्वाधिक सवालों के घेरे में हैं। दान की राशि के प्रबंधन से लेकर मंदिर की कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में इन सभी की भूमिका बताई जाती है। गोपाल राव मंदिर निर्माण सहायक हैं लेकिन महत्वपूर्ण कार्यों में उनका भी व्यापक हस्तक्षेप माना जाता है।
आखिर कहां हैं अनिल मिश्रा
बताया जा रहा है कि अनिल मिश्रा के केरल में होने की चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। टिन्नू ने भी उन पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में उनसे पूछताछ होना जरूरी माना जा रहा है। जांच एजेंसियां उनसे कब और कैसे पूछताछ करेंगी, यह स्पष्ट नहीं है। सवाल है कि अनिल मिश्रा अयोध्या से बाहर क्यों गए हैं? इसके पीछे कोई रणनीति या संयोग, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
एसआईटी जांच के बीच कल अयोध्या जाएंगे सीएम योगी
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण की चल रही जांच के बीच 19 जून को मुख्यमंत्री योगी अयोध्या दौरे पर पहुंचेंगे। इस दौरान वह कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत वह रुदौली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अयोध्या आएंगे। मुख्यमंत्री मणिराम दास छावनी में महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव कार्यक्रम में भाग लेंगे।
एसआईटी को मिले सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ के सुबूत, टिन्नू से लंबी पूछताछ
श्रीराम मंदिर की दान की राशि में हेरफेर के मामले में एसआईटी (विशेष जांच दल) की तफ्तीश तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रही। जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिससे आशंका है कि सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई थी ताकि रकम पार कर सुबूत मिटाए जा सकें। हालांकि, अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

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वहीं, निगरानी करने वाले असल जिम्मेदार एसआईटी के सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं। जांच टीम ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी लंबी पूछताछ की है। एसआईटी की टीम सोमवार से अयोध्या में डेरा डाले है। पहले दिन करीब साढ़े सात घंटे और मंगलवार को 11 घंटे मंदिर परिसर में रहकर टीम ने जांच की थी। बुधवार को भी जांच का सिलसिला जारी रहा।

सुबह करीब दस बजे एसआईटी की टीम मंदिर परिसर पहुंची। जहां ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत अन्य कई पदाधिकारी, कर्मचारी, पुजारी और बैंक कर्मी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने सीसीटीवी कैमरों की स्थिति को गहनता से परखा। इसमें कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जिससे आशंका है कि चोरी करने वालों ने फुटेज से छेड़छाड़ की है।
सामने आ रही बैंक की भी लापरवाही
दान राशि की गिनती प्रक्रिया में बैंक की अहम भूमिका रहती थी। बैंक कर्मियों की मौजूदगी में ही गिनती होती थी। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की जांच में बैंक की लापरवाही सामने आई है। हालांकि, जो जानकारी मिली है उसके अनुसार बैंक कर्मी पदाधिकारियों के दबाव में रहते थे इसलिए वह हस्तक्षेप नहीं कर पाते थे।
सवालों में फंस रहे जिम्मेदार
एसआईटी चंपत राय, गोपाल राव समेत राममंदिर ट्रस्ट के कई अन्य पदाधिकारियों व उनसे जुड़े लोगों से गहनता से पूछताछ कर रही है। सूत्रों के मुताबिक ये लोग कई सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं। कई सवालों के गोलमोल जवाब दे रहे हैं।

  • दान के दिए गए रिकॉर्ड से भी एसआईटी संतुष्ट नहीं है क्योंकि उसमें कई चीजें अस्पष्ट हैं। इसलिए एसआईटी को जांच में समय लग रहा है। विशेष जांच दल ने पूछताछ के लिए करीब दो सौ लोगों की सूची तैयार की है। इनमें से सवा सौ लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें से कुछ से कई बार पूछताछ की है।
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सवाल : कब दर्ज होगी एफआईआर
पकड़े गए पांच संदिग्धों से भी एसआईटी ने पूछताछ की है। उनके पास से रकम भी बरामद हुई थी। सूत्रों के मुताबिक इन संदिग्धों ने कई नामों का खुलासा किया है जिनको इस खेल में शामिल बताया है। जांच टीम अब इनके बयानों की तस्दीक कर रही है। अब सवाल है कि क्या एसआईटी की जांच के बीच एफआईआर दर्ज कराई जाएगी या जांच पूरी होने के बाद। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई भी जाएगी या नहीं… ये सवाल अभी बना हुआ है।

टिन्नू ने लिया अनिल मिश्रा का नाम
आखिरकार एसआईटी ने तीसरे दिन टिन्नू यादव से लंबी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने उसके कार्य के बारे में पूछा, खासकर दान की राशि गणना में उसकी क्या भूमिका रहती थी। टिन्नू सीधे तौर पर अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इन्कार करता रहा। वह बोला, उसने कोई गबन चोरी नहीं किया है। वह सिर्फ मंदिर की अन्य व्यवस्थाओं को देखता था।
इस दौरान उसने ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए उनकी जिम्मेदारी बताई। साथ ही तीन गणना इंचार्जों का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हीं लोगों की जिम्मेदारी दान की राशि की गणना की रहती थी। सूत्रों का कहना है कि टिन्नू से अभी आगे भी पूछताछ हो सकती है।

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