अयोध्या- राष्ट्रपति के हाथों बलिदानी लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत मिलेगा कीर्ति चक्र

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देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले युवा अधिकारी लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उनके शहादत दिवस से कुछ दिन पूर्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों उनके परिजनों को प्रदान किया जाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शशांक के पिता जंग बहादुर तिवारी व माता नीता तिवारी 10 से 14 मई तक दिल्ली प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे देश के शीर्ष नेतृत्व से भेंट करेंगे। यात्रा के पहले दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात तय है, जबकि दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट करेंगे। तीसरे दिन वे सेना प्रमुख से मिलेंगे और चौथे दिन राष्ट्रपति से मुलाकात होगी।

लगभग 14 मई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति की ओर से शशांक तिवारी के परिजनों को कीर्ति चक्र प्रदान किया जाएगा। इस सम्मान को लेकर परिवार को आधिकारिक पत्र भी प्राप्त हो चुका है। वहीं, 22 मई को शशांक के शहादत दिवस पर रामनगरी में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नगर निगम की ओर से चार फरवरी 2025 को निर्मित कल्याण मंडपम का नाम परिवर्तित कर उसे स्व. शशांक तिवारी के नाम से किया जाएगा। इसके साथ ही आरटीओ कार्यालय के निकट स्थित पार्क में उनकी प्रतिमा का अनावरण भी किया जाएगा। शहादत दिवस के अवसर पर सामाजिक कार्यक्रमों की भी श्रृंखला चलेगी। शशांक के भाई अनुराग त्रिपाठी की ओर से कल्याण मंडपम में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिला अस्पताल की टीम को रक्तदान शिविर संपन्न करवाने के लिए पत्र भी भेज दिया है। रक्तदान शिविर में रामकृष्ण सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष आकाश गुप्ता का सहयोग रहेगा।

यह है मामला
अयोध्या के गद्दोपुर निवासी 23 वर्षीय लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी सिक्किम में ड्यूटी के दौरान अपने साथी सैनिक की जान बचाते हुए बलिदान हो गए थे। वे सिक्किम स्काउट यूनिट में तैनात थे और 14 दिसंबर 2024 को सेना में शामिल हुए थे। उत्तर सिक्किम में रूट ओपनिंग पेट्रोल के दौरान एक अग्निवीर नदी में बह गया था। शशांक ने छलांग लगाकर उसे बचा लिया, लेकिन खुद तेज धारा में बह गए थे। उनका शव करीब 800 मीटर दूर बरामद हुआ था।

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