राममंदिर दान चोरी: चढ़ावे के जेवरात का पदाधिकारी नहीं दे पा रहे हिसाब, ट्रस्ट की जमीन खरीद की भी पड़ताल

राम मंदिर की दान की रकम में हेरफेर कर गबन करने के मामले में एसआईटी की छानबीन चौथे दिन भी जारी रही। ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी चढ़ावे के जेवरातों का हिसाब-किताब सही से नहीं दे पा रहे हैं। अब आशंका बढ़ गई है कि करोड़ों की नकदी तो पार हुई ही है सोने, चांदी, हीरे के दान किए गए कीमती जेवरातों में भी हेरफेर किया गया। एसआईटी सुबह दस बजे से देर रात तक पूछताछ कर साक्ष्य जुटाने में लगी रही।

बृहस्पतिवार को केरल से अयोध्या पहुंचे  ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा से एसआईटी ने करीब तीन घंटे तक  पूछताछ की। इसी तरह गोपाल राव और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी सवाल पूछे। सूत्रों के मुताबिक नकदी के रिकॉर्ड संबंधी तमाम खामियां एसआईटी को मिली हैं।

इधर, जांच टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से वर्ष 2021 से अब तक खरीदी गई जमीन से संबंधित पत्रावलियों और अभिलेखों का परीक्षण शुरू कर दी है। सूत्रों का दावा है कि दानराशि के उपयोग और भूमि खरीद के बीच संभावित संबंधों को समझने के लिए एसआईटी विभिन्न स्तरों पर रिकॉर्ड खंगाल रही है। जमीन खरीद प्रक्रिया, भूमि का मूल्यांकन, भुगतान की प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच की जा रही है।

 

इस क्रम में तीन लोगों से पूछताछ भी की गई है। बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में बाजार मूल्य और खरीद मूल्य के बीच बड़े अंतर को लेकर भी सवाल उठे हैं। भूमि खरीद से संबंधित फाइलों, अनुमोदनों, भुगतान अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि भूमि खरीद के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया था या नहीं।

71 एकड़ जमीन अक्तूबर से फरवरी तक खरीदी गई 
राम मंदिर ट्रस्ट की 21 मार्च को हुई बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार ट्रस्ट ने अक्तूबर 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच कुल 71 एकड़ जमीन खरीदी है। जमीन खरीद पर कुल पांच करोड़ 69 लाख 48 हजार 650 रुपये व्यय किए गए।

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  • 2691 वर्ग फीट जमीन 43.34 लाख रुपये, 5974 वर्ग फीट जमीन 94.17 लाख रुपये, 12,378 वर्ग फीट जमीन 2.54 करोड़ रुपये तथा 9788 वर्ग फीट जमीन 1.54 करोड़ रुपये में खरीदी गई। इन जमीनों से संबंधित पत्रावलियों की भी एसआईटी जांच कर रही है।

नजूल भूमि 24 करोड़ रुपये में खरीदने के दावे की भी पड़ताल 

  • कुछ भूमि सौदों को लेकर उठे सवालों की भी पड़ताल की जा रही है। आप सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर जमीन खरीद से संबंधित दस्तावेज साझा कर आरोप लगाया था कि करीब तीन करोड़ रुपये की एक भूमि का सौदा राम मंदिर ट्रस्ट ने 24 करोड़ रुपये में किया। एसआईटी संबंधित दस्तावेजों, मूल्यांकन रिपोर्टों और भुगतान रिकॉर्ड का परीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में जुटी है।

टिन्नू यादव से दोबारा पूछताछ, अनिल मिश्रा पर भी कसेगा शिकंजा
चंपत राय के ड्राइवर व सबसे अधिक सवालों के घेरे में रहने वाले टिन्नू यादव से एसआईटी ने बृहस्पतिवार को दोबारा पूछताछ की। गिनती करने वाले लोगों में उसके खास कर्मचारी कौन लोग थे? उसकी मौजूदगी वहां क्यों रहती थी? वह गोलमाल जवाब देता रहा। वहीं उसने गिनती प्रक्रिया में अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम बताया है, इसलिए एसआईटी इन दोनों पर शिकंजा कस सकती है। खासकर अनिल मिश्रा पर। वह शुरू से मामले से बचते रहे हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट में कोई पद नहीं….फिर भी गोपाल राव के पास है पास बनाने का अधिकार
राम मंदिर के निर्माण सहायक गोपाल राव का ट्रस्ट में कोई पद नहीं है, मगर उनकी शक्तियां अपार हैं। वह भी महासचिव चंपत राय की तरह अपने नाम से वीवीआईपी पास जारी करते हैं। यही नहीं, मंदिर संबंधी हर कार्य में उनकी अहम भूमिका रहती थी। एक तरह से मंदिर में होने वाली हर गतिविधि की जानकारी, मैनेजमेंट आदि उनके पास रहता था। इसमें उनका एक रिश्तेदार भी शामिल है।

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वह भी उनकी शक्तियों का इस्तेमाल कर खुद को किसी अधिकारी से कम नहीं समझता था। ये सभी सवालों के घेरे में हैं। कर्नाटक निवासी गोपाल राव मंदिर में निर्माण सहायक हैं। जब से दान राशि की चोरी का मामला उजागर हुआ है, तब से वह सामने नहीं आए हैं। उनको लेकर तमाम चर्चाएं हैं। सूत्रों के मुताबिक, भले ही गोपाल का ट्रस्ट में कोई पद नहीं है, लेकिन वह दान राशि की गणना की प्रक्रिया से लेकर मंदिर प्रबंधन तक के मामलों में सीधे तौर पर शामिल रहते हैं।

रिश्तेदार भी करने लगा खेल
मंदिर के कार्यों से गोपाल ने अपने एक रिश्तेदार को जोड़ रखा है। वह भी उनकी शह पर मंदिर के प्रत्येक कार्य में हस्तक्षेप करने लगा। वह भी गोपाल की आईडी से वीवीआईपी दर्शन की बुकिंग करता है। मतलब नाम गोपाल राव का और काम उसका रिश्तेदार करता है। वहीं सूत्रों ने यह भी बताया कि गोपाल को ये अधिकार ट्रस्ट ने दे रखे थे। जबकि ये अधिकार बेहद संवेदनशील है, क्योंकि जिनके पास पास बनते हैं, वे वीवीआईपी दर्शन मार्ग से मंदिर परिसर में जाते हैं। वहां से देश-विदेश के प्रमुख लोग भी गुजरते हैं।

निर्माण के वक्त थी बड़ी जिम्मेदारी
मंदिर निर्माण के वक्त गोपाल राव की बड़ी जिम्मेदारी रही है। निर्माण सामग्री, खासकर पत्थरों की खरीदारी कहां से होनी है, कौन-सा पत्थर आना है आदि मामलों में उनकी अहम भूमिका बताई जाती है। अब जो विवाद हुआ है, उससे तमाम सवाल उठने लगे हैं।

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