दिगंबर जैन मंदिर परिसर में आयोजित पांच दिवसीय भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का रविवार को धार्मिक अनुष्ठानों एवं मंगल विधान के साथ समापन हो गया। महोत्सव के दौरान 923 जिन प्रतिमाओं की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत, विद्वान एवं समाजजन उपस्थित रहे।
जैन मंदिर के जीवन प्रकाश जैन ने बताया कि पांच दिवसीय महोत्सव में जैन धर्म की प्राचीन परंपराओं, धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक संस्कारों का दिव्य संगम देखने को मिला। देश के विभिन्न राज्यों से आए संतों, विद्वानों एवं श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

जैन मंदिर कमेटी के पीठाधीश्वर रवीन्द्र कीर्ति जैन एवं प्रज्ञाश्रमिणी चंदनामती माता ने कहा कि अयोध्या जैन धर्म की अत्यंत पवित्र एवं ऐतिहासिक तीर्थस्थली है। प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की जन्मभूमि होने के कारण इस नगरी का जैन धर्म में विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि पूज्य गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता की प्रेरणा से भरत चक्रवर्ती के 923 पुत्रों को समर्पित भव्य जिनमंदिर का निर्माण कराया गया है, जिसमें स्थापित 923 जिन प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण रही।महोत्सव के दौरान मंत्रोच्चार, पूजन-विधान, धार्मिक प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर स्थित 20वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ को समर्पित दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली में निर्मित जिनालय भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए। उन्होंने जैन संतों एवं विद्वानों का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा जैन धर्म की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की सराहना की।
समापन अवसर पर शिखर कलशारोहण एवं विशेष मंगल विधान संपन्न हुआ। आयोजकों ने कहा कि यह महोत्सव जैन धर्म के अहिंसा, शांति और मानव कल्याण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर पारस जैन, मनोज जैन सहित जैन समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।








