भव्य राम मंदिर निर्माण का कार्य निरंतर प्रगति पर है। मंदिर का दूसरा तल पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है, अब केवल दरवाजे लगना शेष है। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने बताया कि आगामी 15 अक्टूबर से परकोटे में बने सभी 6 मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर सकेंगे। हालांकि मंदिर के दूसरे तल पर फिलहाल किसी को जाने की अनुमति नहीं होगी।
कारसेवकपुरम स्थित भारत कोठी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए चंपत राय ने बताया कि मंदिर में ध्वजारोहण कार्यक्रम की तैयारी अंतिम चरण में है। अतिथियों की सूची बनाई जा रही है और इस बार यह कार्यक्रम देशव्यापी न होकर अयोध्या व आसपास के 25 जिलों तक सीमित रहेगा।
परिसर में प्राकृतिक सौंदर्य का समावेश
चंपत राय ने कहा कि 70 एकड़ क्षेत्र में से 50 एकड़ भूमि खुला आकाशीय क्षेत्र (ओपन टू स्काई) रहेगा, जबकि शेष 30 एकड़ भूमि हरियाली और मिट्टी के लिए सुरक्षित रहेगी। यहां सड़कों, पुष्करणी और जलाशय की विशेष व्यवस्था होगी। साथ ही बंदरों और पक्षियों के लिए भी एक बड़ा जलाशय और सुरक्षित स्थान बनाया जाएगा।
पंचवटी और संग्रहालय की योजना
करीब 10 एकड़ भूमि में पंचवटी विकसित होगी, जहां जलाशय के साथ प्राकृतिक वातावरण में जीव-जंतुओं को स्थान मिलेगा। साथ ही मंदिर परिसर में अत्याधुनिक संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। आईआईटी मद्रास गैलरी का विकास करेगी और दिल्ली की एक विशेषज्ञ संस्था इसका तकनीकी भाग तैयार करेगी।
श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं
मंदिर परिसर में तीन लिफ्ट (दो उत्तर, एक पश्चिम) लगाई जा रही हैं। वहीं परकोटे के दक्षिण-पूर्वी कोने में एक विशाल जूता घर बनकर तैयार हो गया है, जिसमें एक लाख श्रद्धालु प्रतिदिन अपने जूते-चप्पल सुरक्षित रख सकेंगे।
ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्री तैयार होगी
महामंत्री ने बताया कि पांच वर्षों की मंदिर निर्माण यात्रा पर एक ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्री भी तैयार की जाएगी। इसमें खुदाई, सॉइल टेस्ट से लेकर चरणबद्ध निर्माण तक की संपूर्ण प्रक्रिया दर्ज की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नवंबर में होने वाला ध्वजारोहण कार्यक्रम प्राण प्रतिष्ठा की पुनरावृत्ति नहीं होगा, बल्कि यह आयोजन अयोध्या और आसपास के जिलों पर केंद्रित रहेग









