मुख्यमंत्री धामी ने मानसून से पहले राज्य स्तरीय मॉकड्रिल के दौरान अधिकारियों को आपदा प्रबंधन को लेकर जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा से निपटने के लिए पहले से तैयारी, सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल सबसे जरूरी है।
रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को मजबूत किया गया
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग, ड्रोन, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और डेटा आधारित जोखिम आकलन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इससे संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।
कहा कि रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को मजबूत किया गया है। अर्ली वार्निंग सिस्टम को भी लगातार बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि दूर-दराज के इलाकों तक समय पर चेतावनी पहुंच सके। उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण, पौधरोपण, ग्लेशियर अध्ययन और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि पर्यावरण संरक्षण से आपदा का खतरा कम किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के दौरान सामने आई कमियों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाए। सभी जिलों से 72 घंटे के भीतर समीक्षा रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी जाए। उन्होंने लोगों को आपदा से बचाव, आपातकालीन नंबरों और जरूरी सावधानियों की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन योजना और सभी 13 जिलों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं आपदा के समय विभागों की जिम्मेदारी तय करने और बेहतर समन्वय के साथ राहत व बचाव कार्य में मदद करेंगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अग्निशमन विभाग की ओर से लगाई गई आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी भी देखी। प्रदर्शनी में डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर ड्रोन, सोनार सिस्टम और अन्य आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।






