सरकार बदलने के साथ ही पश्चिम बंगाल में पीएम से जुड़ी तमाम योजनाओं को अब रफ्तार मिल सकती है। ममता सरकार ने इस तरह की कई योजनाओं को अपने यहां लागू नहीं किया था। बंगाल सरकार से इसी तरह की खींचातानी के चलते जनगणना का पहला चरण भी शुरू नहीं हो पाया था। अब यह भी नई सरकार के गठन के बाद जल्द शुरू हो जाएगा। उधर, तमिलनाडु व केरल में भी केंद्र व राज्य के तमाम मुद्दों पर पहले जैसा टकराव खत्म होने या कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ममता बनर्जी की सरकार ने केंद्र की आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं की। उसका तर्क था कि इसी तरह की योजना उनकी सरकार ने पहले से चला रखी है। पीएम किसान व पीएम आवास योजना को लेकर भी केंद्र व राज्य सरकार के बीच फंड, लाभार्थियों की वास्तविक संख्या को लेकर भी विवाद रहा है। स्कूलों के अपग्रेडिंग संबंधी पीएम श्री योजना बंगाल में सियासत की भेंट चढ़ गई । हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैली में कहा था कि पीएम नाम से केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं का टीएमसी सरकार या नाम बदल देती है या उसे पूरी तरह लागू ही नहीं करती। जैसे पीएम आवास योजना पीएम जन आरोग्य योजना आदि।
तमिलनाडु ने नीट व राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर जताया एतराज
तमिलनाडु ने भी पीएम श्री योजना लागू करने में आनाकानी की। इसी तरह राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) व राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी स्टालिन सरकार ने तीखा विरोध किया था। खास तौर पर तीन-भाषा नीति पर उसे खासा एतराज था। केंद्र सरकार का कहना था, कि डीएमके सरकार केंद्र द्वारा वित्त पोषित योजनाओं का नाम बदल रही है या उनका श्रेय खुद ले रही है। तमिलनाडु व केरल में इसको लेकर केंद्र व सरकार के बीच कई बार गतिरोध बना रहा। अब चूंकि चुनाव हो गए हैं तो इन तीनों राज्यों में यह योजना लागू करने के लिए केंद्र सरकार फिर पहल करेगा।







