राममंदिर चढ़ावा घोटाले में कांग्रेस की एंट्री: युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने थाने में दी तहरीर, जांच पूरी होने तक ट्रस्टियों की शक्तियां सीज करने की मांग

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योध्या में स्थित भव्य राम मंदिर की दान पेटिका से हुई करोड़ों रुपये की कथित चोरी और वित्तीय महा-गबन का मामला अब पूरी तरह से राष्ट्रीय और राजनीतिक पटल पर गरमाता जा रहा है। समाजवादी पार्टी और दक्षिणपंथी संगठनों के बाद अब इस महा-विवाद में देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी खुलकर मैदान में आ गई है। उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के जुझारू प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने भारी समर्थकों के साथ सीधे राम जन्मभूमि थाने पहुंचकर प्रभारी निरीक्षक को एक लिखित और नामजद तहरीर सौंपी है। इस तहरीर में कांग्रेस नेता ने घोटाले के दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त से सख्त विधिक कार्रवाई करने की मांग की है, साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका और उनकी प्रशासनिक नीयत पर भी गंभीर वैधानिक सवाल खड़े किए हैं।

इस राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम के मुख्य पहलुओं पर नजर डालें तो युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि वे सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इस महा-घोटाले की जांच के लिए गठित की गई 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का पूरी तरह स्वागत करते हैं, क्योंकि यह एक विधिक और संवैधानिक प्रक्रिया है। हालांकि, उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाला पुराना संदर्भ साझा करते हुए याद दिलाया कि यह राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व वर्ष 2022 में भी इसी प्रकार के कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय विसंगतियों का एक बड़ा प्रकरण सामने आया था, और उस समय भी जन-आक्रोश को शांत करने के लिए कागजों पर एक एसआईटी (SIT) का गठन किया गया था, लेकिन उसका क्या परिणाम निकला और किस बड़े दोषी को जेल हुई, यह आज तक देश के सामने नहीं आ सका।

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इसी पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए शरद शुक्ला ने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक अत्यंत कड़ाई और त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि— “जब तक एसआईटी इस महा-गबन की अपनी अंतिम और निष्पक्ष जांच पूरी नहीं कर लेती, तब तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य संबंधित पदाधिकारियों की सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों को तत्काल प्रभाव से ‘सीज’ (समाप्त) कर दिया जाना चाहिए।”
युवा कांग्रेस नेता ने इसके पीछे प्रशासनिक तर्क देते हुए कहा कि जब किसी दागी या संदेहास्पद संस्था के सर्वोच्च पदाधिकारी अपने रसूखदार पदों पर लगातार बने रहते हैं, तो उनके पद के प्रभाव और खौफ के कारण कनिष्ठ कर्मचारियों के बयान प्रभावित होते हैं, जिससे निष्पक्ष जांच पूरी तरह बाधित होने की प्रबल आशंका बनी रहती है। ऐसे में यदि ट्रस्ट के पदाधिकारियों के भीतर रत्ती भर भी धार्मिक शुचिता बची है, तो उन्हें स्वतः ही नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जांच पूरी होने तक अपने-अपने पदों को छोड़ देना चाहिए। उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व के सबसे बड़े और पवित्र मंदिर में बार-बार एक ही प्रकार के वित्तीय गबन के आरोप सामने आना संपूर्ण सनातन समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक और चिंता का विषय है।
शरद शुक्ला ने अपने शिकायती पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि अयोध्या राम मंदिर से जुड़े इस दान-चोरी विवाद की गूंज और तीखी चर्चाएं केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों, जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत तक में बेहद जोरों पर हो रही हैं। रामलला के खजाने में हुई इस संगठित सेंधमारी से देश-विदेश के उन करोड़ों गरीब और अमीर श्रद्धालुओं की पवित्र धार्मिक भावनाएं बुरी तरह आहत हो रही हैं, जिन्होंने अपने खून-पसीने की कमाई का एक-एक रुपया प्रभु के चरणों में अर्पित किया था। प्रभारी निरीक्षक को दी गई अपनी इस तहरीर में उन्होंने मांग की है कि बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के, वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस घोटाले की तह तक जाकर इसके मुख्य मास्टरमाइंडों के खिलाफ देशद्रोह और धोखाधड़ी जैसी कठोरतम धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाए।

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दूसरी तरफ, ग्राउंड जीरो यानी राम जन्मभूमि परिसर में शासन की विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश लगातार तीसरे दिन भी अत्यंत गोपनीय और आक्रामक तरीके से जारी है। जिला प्रशासन, नवनियुक्त डीएम शशांक त्रिपाठी और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर के कड़े समन्वय के बीच, एसआईटी की तीन सदस्यीय टीम राम जन्मभूमि के मुख्य प्रशासनिक भवन में डेरा डाले हुए है। जांच टीम वित्तीय लेनदेन से जुड़े सभी कंप्यूटर हार्डवेयर, पिछले छह महीनों के कैश-लेखा रजिस्टर और बैंक रसीदों को खंगालने में लगी हुई है। इसके साथ ही, दान राशि की गिनती की गोपनीय ड्यूटी से जुड़े 50 से अधिक संविदा और नियमित कर्मचारियों को अलग-अलग कमरों में बिठाकर उनके लाइव बयान दर्ज किए जा रहे हैं और संदिग्धों की निशानदेही पर अब तक हुई ₹2 करोड़ की नकद रिकवरी के स्रोतों को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा रहा है।


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