सदन में CM योगी ने की घोषणा, बढ़ाई जाएगी तीन तरह की कैटेगरी की पेंशन, जानिए बदलाव क्या होगा

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान करीब 1.06 करोड़ निराश्रित महिलाओं, वृद्धों और दिव्यांगजनों की पेंशन धनराशि बढ़ाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बजट में इसकी घोषणा नहीं हुई थी, लेकिन हम इसमें इजाफा करने जा रहे हैं। सीएम की घोषणा के बाद पेंशन की धनराशि 1000 हजार रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये होगी। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में भी इसकी घोषणा की थी।

 

वहीं दूसरी ओर सीएम ने सदन में शंकराचार्य विवाद पर पहली बार अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कोई मुख्यमंत्री, मंत्री, सपा अध्यक्ष बनकर क्या प्रदेश में घूम सकता है? शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और सम्मानित है। लेकिन हर काम नियम से होता है। सदन भी नियमों और परंपराओं से चलता है। कानून सबके लिए बराबर होता है। हम सभी संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े हैं। 

कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं

 मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है। विद्वत परिषद द्वारा अधिकृत व्यक्ति ही शंकराचार्य बन सकता है। हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता। माघ मेला में उस दिन 4.50 करोड़ श्रद्धालु आए थे। कोई कहीं भी जाकर माहौल खराब नहीं कर सकता है। वह माघ मेला के निकास द्वार से जाने का प्रयास कर रहे थे। यह श्रद्धालुओं के जीवन को खतरे में डाल सकता था। वहां भगदड़ मच सकती थी। कोई जिम्मेदार व्यक्ति ऐसा आचरण कैसे कर सकता है। हम मर्यादित लोग हैं। कानून का पालन करना और करवाना जानते हैं।सपा सदस्याें से पूछा कि यदि वह शंकराचार्य थे तो आपने वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज करने के साथ एफआईआर क्यों दर्ज कराई थी।

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सपा पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के प्रकरण में भी आपने ऐसा ही किया। लोगों को गुमराह करने के बजाय देश के बारे में सोचना शुरू कीजिए। सपा ने राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन में विकास का विरोध किया। सपा सरकार में थानों और जेलों में जन्माष्टमी मनाने से रोका गया। कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई। अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा को रोका। रामभक्तों पर गोलियां चलवाई। मंदिर निर्माण रोकने के लिए अदालत में वकील खड़े किए। सीएम ने कहा कि सनातन आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता है। प्रदेश के पुनर्जागरण के हमारे मॉडल में आस्था और विकास दोनों शामिल हैं। दीपोत्सव, रंगोत्सव जैसे कार्यक्रमों से करोड़ों लोग जुड़कर गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। आस्था को सम्मान देने से प्रदेश की जीडीपी में इजाफा हुआ है।

अभिभाषण का विरोध मातृशक्ति का अपमान

सीएम ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण का मुख्य विपक्षी दल का आचरण मातृशक्ति का अपमान है। यह कार्यक्रम अचानक नहीं थोपा गया था। दलीय बैठकों में चर्चा हुई थी। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि आप श्रेष्ठ कुल में पैदा हुए, ब्राह्मण और सदन के वरिष्ठ सदस्यों में से हैं। आप सनातन की बात कर रहे थे, लेकिन इसके अनुरूप कार्य नहीं किया। सनातन धर्म की परंपरा में अपनी उम्र से बड़ी महिला को भी मां के समान सम्मान दिया जाता है। महर्षि वेदव्यास ने हजारों साल पहले बताया था.. ‘नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया’, यानी मां के समान कोई छाया नहीं है, मां के समान कोई सहारा नहीं है, मां के समान कोई रक्षक नहीं और मां के समान कोई प्रिय नहीं है।

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पूर्ववर्ती योजनाओं पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले गरीबों को इंदिरा आवास योजना के तहत मात्र ₹20,000 दिए जाते थे, जो पर्याप्त नहीं थे और न ही आवास समय पर पूरे हो पाते थे। उस दौरान योजनाओं का लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंचता था। इसके विपरीत वर्तमान डबल इंजन सरकार नगरीय क्षेत्रों में ₹2.5 लाख और ग्रामीण क्षेत्रों में ₹1.20 लाख आवास निर्माण के लिए उपलब्ध करा रही है। इसके अतिरिक्त शौचालय निर्माण के लिए ₹12 से 15 हजार की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। साथ ही मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी के बराबर मानदेय भी लाभार्थी को प्रदान किया जाता है, जिससे घर निर्माण में आर्थिक सहयोग सुनिश्चित हो सके।

बहुआयामी गरीबी में आई उल्लेखनीय कमी

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं और समग्र विकास के प्रयासों के परिणामस्वरूप 6 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने इसे सरकार की परिणाम-आधारित कार्यशैली का प्रमाण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सफाई कर्मियों और निर्माण श्रमिकों जैसे शेष जरूरतमंद वर्गों के लिए आवास के लिए एक नई योजना लाई जा रही है। इसकी घोषणा आगामी बजट भाषण में की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी सहायता से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास केवल आवास या आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के समन्वित विस्तार के माध्यम से समग्र विकास सुनिश्चित करना है। “हर गरीब को छत, हर निराश्रित को सम्मान और हर जरूरतमंद को अधिकार” इसी भावना के साथ प्रदेश जीरो पॉवर्टी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दोहराया कि यह धन जनता का है और उसका उपयोग जनता के हित में ही किया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ बिना भेदभाव हर वर्ग तक पहुंचे और उत्तर प्रदेश गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित करे।

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