कर्नाटक की दो बड़ी महिला अफसरों का झगड़ा अब कोर्ट के बाहर सुलझेगा। आईएएस रोहिणी सिंधुरी और आईपीएस डी रूपा मौदगिल के बीच लंबे समय से मानहानि का विवाद चल रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस कानूनी लड़ाई से दोनों अफसरों का करियर बर्बाद हो रहा है।
करियर बर्बादी पर कोर्ट की चिंता
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने दोनों पक्षों में समझौता कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ बनाया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ये दोनों अधिकारी एक-दूसरे का करियर तबाह कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि यह विवाद अब कोर्ट में लड़ने के बजाय आपस में बातचीत से सुलझना चाहिए।
कानूनी कार्यवाही पर लगी रोक
सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में दोनों अफसरों को अंतरिम राहत भी दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जब तक मध्यस्थता की प्रक्रिया चलेगी, तब तक दोनों के मामलों की अदालती कार्यवाही पर पूरी तरह रोक रहेगी। अब रोहिणी सिंधुरी और डी रूपा को जस्टिस कुरियन जोसेफ के सामने हाजिर होना होगा। शीर्ष अदालत को उम्मीद है कि पूर्व न्यायाधीश की देखरेख में यह विवाद शांति से सुलझ जाएगा।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा विवाद साल 2023 में शुरू हुआ था। तब दोनों महिला अफसरों ने एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से कई गंभीर आरोप लगाए थे। सोशल मीडिया पर छिड़ी यह जंग इतनी बढ़ी कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मुकदमे ठोक दिए। रोहिणी सिंधुरी ने कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर कर डी रूपा के केस को चुनौती दी थी। लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।








