संसद के मानसून सत्र का आज सातवां दिन है। लोकसभा में परीक्षा में सुधारों से जुड़े विधेयक पर चर्चा शुरू हो गई है। चर्चा के लिए आठ घंटे का समय निर्धारित किया गया है। स्पीकर ओम बिरला ने जरूरत पड़ने पर इससे अधिक समय देने की बात कही है।
लोकसभा में अखिलेश यादव बोले- प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि छात्र आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे आंदोलन को दूर से देख रहे थे। उनके मुताबिक, आंदोलन की सफलता के बाद एक नया नारा सामने आया कि सरकार को अहंकार था कि वह कभी नहीं झुकती, लेकिन नई पीढ़ी ने साबित कर दिया कि “सरकार भी झुकती है, झुकाने वाला चाहिए।” उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलन से जुड़े कई मुद्दों को स्वीकार किया, लेकिन सवाल यह है कि जिन बातों पर सहमति बनी, उन्हें सदन के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा है।
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जब मंत्री जी लौटे, जो अब मंत्री नहीं रहे, उनके स्वागत से मुझे कोई शिकायत नहीं है। लेकिन सरकार को कितनी राहत मिली होगी कि एक ‘प्रधान’ को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कई वर्षों से नकारात्मक राजनीति कर रही है और इसके लिए हजारों करोड़ रुपये प्रचार पर खर्च किए गए। अखिलेश यादव ने कहा कि वह युवा पीढ़ी को बधाई देते हैं, क्योंकि छात्रों और युवाओं ने अपने आंदोलन के जरिए सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया।
पेपर लीक रोकने के लिए यह समय की मांग: बांसुरी स्वराज
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह विधेयक न केवल जरूरी है, बल्कि आज के समय की आवश्यकता भी है। उन्होंने कहा कि देश में परीक्षा माफिया अब संगठित रूप ले चुका है और यह कानून उससे प्रभावी ढंग से निपटने का रास्ता तैयार करता है। इस विधेयक को लाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पेपर लीक एक घोर अपराध है और यह केवल बयान नहीं, बल्कि सरकार की स्पष्ट मंशा है। इसी उद्देश्य से यह विधेयक संसद में लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून जांच और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी जटिलताओं को दूर करने का प्रयास करता है। इसके तहत केंद्र सरकार को विशेष टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी, जबकि ट्रायल तीन महीने में पूरा कर फैसला सुनाने का प्रावधान किया गया है।
खुद को वकील बताते हुए बांसुरी स्वराज ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘परीक्षा पर चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़कर उन्हें प्रेरित किया है। उनका प्रयास रहा है कि देश के विद्यार्थी ‘एग्जाम वॉरियर’ बनें, न कि ‘एग्जाम वॉरियर’ बनने से पहले परीक्षा के दबाव में टूटें। भाजपा सांसद ने कहा कि मोदी सरकार के दौरान आईआईटी और मेडिकल संस्थानों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के नामांकन में बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सामाजिक न्याय के दायरे को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
गोगोई बोले- लड़कियों पर अत्याचार, पैलेट गन का इस्तेमाल…
गौरव गोगोई ने कहा कि छात्र आंदोलन ने यह दिखा दिया कि लोगों के मन से डर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की रात 10 बजे भी लोग प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और लोकतंत्र के समर्थन में खड़े रहे। उन्होंने कहा कि खून से लथपथ चेहरा होने के बावजूद एक छात्र पुलिस के सामने डटा रहा और लोगों को लोकतंत्र की ताकत का एहसास कराया।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन के दौरान कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल का समर्थन नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि उन भावनाओं को भी याद रखना चाहिए, जिन्हें छात्रों ने सामने रखा। इस दौरान उन्होंने शायर वसीम बरेलवी की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा, “उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है, जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है।” गोगोई ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान एक युवक ने आगे आकर एक लड़की को बचाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि एक छात्र ने कहा था कि जिस उंगली से उसने कमल के निशान पर वोट दिया था, उसी उंगली को आज पुलिस ने तोड़ दिया।
उन्होंने देशभर के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि कई लोगों ने प्रदर्शनकारियों के लिए स्विगी के माध्यम से भोजन भेजा और वकीलों ने भी लोकतंत्र के समर्थन में उनका साथ दिया। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, एक पुलिसकर्मी ने एक लड़की को थप्पड़ मारा और एक बच्ची के निजी अंग पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को भुलाया नहीं जाएगा और इस पूरे मामले में गृह मंत्री से जवाब मांगा। गौरव गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार यह विधेयक इसलिए लेकर आई है क्योंकि उसकी पुलिस छात्र आंदोलन को दबाने में सफल नहीं हो सकी। उन्होंने बिहार में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा एके-47 के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया।
गोगोई ने कहा- प्रधान सिर्फ एक मुखौटा
कांग्रेस सांसद ने कहा कि आप सुधार नहीं चाहते, क्योंकि RSS के लिए शिक्षा विभाग अहम है। आप चाहते हैं कि शिक्षा के माध्यम से इस पीढ़ी के लोग आपके संगठन के सदस्य बने। डीयू, IIT, जेएनयू ने अपने स्टूडेंट्स ने कहा कि प्रदर्शन में मता जाओ। क्या ऐसे हम आने वाले भारत का निर्माण करेंगे। राहुल गांधी ने बार-बार कहा कि प्रधान सिर्फ एक मुखौटा हैं। उनके हटने से भी शिक्षा में सुधार आएगा, इसका विश्वास न हमें है, न बच्चों को। बच्चे क्या करें। उनके पास पैसे नहीं है कि 30-30 लाख में पैसे खरीद सकें। वे नाराज हैं। जब वे लड़ नहीं पाते तो आत्महत्या कर लेतें हैं।
गौरव गोगोई बोले- NTA में 34 स्वीकृत पद, फिर 47 अधिकारियों पर कार्रवाई कैसे?
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि व्यापक चर्चा करने के बजाय प्रधानमंत्री युवाओं से इंस्टाग्राम पर अधिक ध्यान देने की बात करते हैं। गौरव गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाई पावर कमेटी के गठन की बात की, लेकिन दो वर्ष पहले गठित राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि यदि समिति ने इतना अच्छा काम किया था, तो फिर दो साल बाद पेपर लीक जैसी घटनाएं क्यों हुईं।
उन्होंने दावा किया कि सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह इस मुद्दे पर गंभीर है। गोगोई ने कहा कि सरकार ने एनटीए के 47 लोगों को बदले जाने की बात कही है, लेकिन वह जानना चाहते हैं कि ये 47 लोग कौन हैं। उन्होंने कहा कि एनटीए में स्वीकृत पदों की संख्या 34 है और इनमें भी 10 से 12 पद खाली हैं, ऐसे में 47 अधिकारियों पर कार्रवाई का दावा कैसे किया जा रहा है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि एनटीए के महानिदेशक (डीजी) को बदल दिया गया, लेकिन चेयरमैन को पद पर बनाए रखा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि चेयरमैन पर इतना भरोसा क्यों जताया जा रहा है। उन्होंने चेयरमैन के पिछले कार्यकाल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जहां कथित तौर पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे।






