केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की चमोली जिले के वसुंधरा ताल में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करेगा। इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इससे पहले सीबीआरआई द्वारा विकसित इस स्वदेशी तकनीक को मनाली में स्थापित किया गया था, जहां से पिछले करीब एक वर्ष से लगातार डेटा प्राप्त हो रहा है। अब इसी तकनीक को वसुंधरा ताल में लगाया जाएगा।
सेंसर एक से दो मिनट के भीतर कंट्रोल रूम को सूचना भेज देंगे
प्रणाली झील से संबंधित प्राकृतिक परिवर्तनों और संभावित आपदाओं का डेटा एवं तस्वीरें रीयल टाइम में निगरानी केंद्र तक भेजेगी। किसी भी असामान्य गतिविधि, जैसे हिमखंड का झील में गिरना, जलस्तर का अचानक बढ़ना या झील के प्राकृतिक बांध में दरार आने की स्थिति में सेंसर एक से दो मिनट के भीतर कंट्रोल रूम को सूचना भेज देंगे।
सेंसर सेटेलाइट से जुड़े होंगे और घटनाक्रम की पुष्टि के लिए कैमरे भी लगाए जाएंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी कारण वसुंधरा ताल टूटता है तो पानी और मलबा करीब 20 किलोमीटर नीचे तक मात्र आठ से दस मिनट में पहुंच सकता है।




