लंबे समय से बीमार चल रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज निधन हो गया है। उनके आकस्मिक निधन के चलते प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। पूर्व सीएम की अंतेष्टि 20 मई को पुलिस सम्मान के साथ सम्पन्न होगी।
प्रदेश के सभी स्कूल कल रहेंगे बंद
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी के निधन पर राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। जिसे देखते हुए प्रदेश के शासकीय, अशासकीय और निजी स्कूल एवं कार्यालय आज बंद रहेंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
दिल का दौरा पड़ने से हुई बीसी खंडूड़ी की मृत्यु
पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि.) की हल्का दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। वह 49 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। मंगलवार सुबह 11.10 बजे उन्होंने 91 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी (सेनि.) को एक अप्रैल को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की जांच में उनकी आंतों में रक्तस्राव होने की बात सामने आई थी। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। मंगलवार सुबह करीब 11.10 मिनट पर उन्हें हल्का कार्डियक अरेस्ट आया और उनकी मृत्यु हो गई। खंडूरी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्हें बार-बार अस्पताल आना पड़ रहा था। सही होने के बाद उनको घर भेज दिया जाता था लेकिन अप्रैल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया। 49 दिनों से वह विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में थे। उनकी मृत्यु से पूरे प्रदेश में शोक है।

उत्तराखंड ने खोया सशक्त नेतृत्व : निशंक
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने पूर्व सीएम मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़़ी (सेनि) के निधन पर कहा कि मेरे जीवन से एक ऐसे आत्मीय अभिभावक, मार्गदर्शक और स्नेहिल संरक्षक के दूर हो जाने का असहनीय दुःख है, जिसकी रिक्तता कभी भरी नहीं जा सकेगी। उनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन, सादगी और जनसेवा का प्रेरणादायी उदाहरण था। भारतीय सेना में मेजर जनरल के रूप में मातृभूमि की सेवा करने के बाद उन्होंने राजनीति में भी राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ जनहित को अपना सर्वोच्च ध्येय बनाया। राजनीति के अनेक पड़ाव आए। परिस्थितियां बदलीं लेकिन उनका स्नेह, विश्वास और आत्मीय मार्गदर्शन कभी नहीं बदला। आज उनके जाने से केवल उत्तराखंड ने अपना एक सशक्त नेतृत्व खोया है बल्कि मैंने व्यक्तिगत रूप से अपने जीवन का एक आत्मीय संरक्षक खो दिया है।









