अयोध्या : रामनगरी में जेष्ठ पूर्णिमा पर माँ सरयू की जयंती पर महाआरती।

Spread the love

रामनगरी अयोध्या में जेष्ठ पूर्णिमा पर माँ सरयू की जयंती बड़े धूम धाम से मनाई गई।लेकिन इस कोरोना काल में अनलॉक के दौरान ज्यादा श्रद्धालु नहीं दिखे स्थानीय लोगों ने मां सरयू की भव्य आरती कर पूजन अर्चन किया। जिसमें अयोध्या के संत भी शामिल हुए। दिव्य मां सरयू आरती सेवा समिति के तत्वावधान में मां सरयू की दिव्य फूल बंगले की झांकी सजाई गई और 5100 बत्ती महाआरती व प्रसाद वितरण कर पूरे सरयू में अद्वितीय दीपदान किया गया जिसमें पूरा सरयू तट दीपों से रोशन हो गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री तेजनारायण पाण्डेय पवन ने मां सरयू की आरती की।वही जेष्ठ पूर्णिमा पर मां सरयू को लेकर इस वर्ष सरयू महोत्सव का आयोजन बृहद स्तर पर कोरोना काल के कारण नहीं मनाया जा सका लेकिन अयोध्या के स्थानीय नागरिक व संतों ने मां सरयू की भव्य आरती की।

कार्यक्रम के संस्थान अध्यक्ष शशिकांत दास ने कहा कि आज पूरी अयोध्या के लिए प्रसन्नता का विषय है।जो अयोध्या माँ सरयू के नाम से जानी जाती हैं।वही इस मां सरयू माँ का जन्म उत्सव मना रहे हैं।और इससे बेकर प्रसन्नता का विषय क्या होगा। कोरोना महामारी के चलते माँ सरयू का जन्म उत्सव भव्य रूप से नही बनाया गया।सरकार की गाइडलाइन से इस आयोजन को सादगी से मना रहे है। उन्होंने कहा घाटो पर सरयू जी का आरती हो रही है। सरयू से प्रार्थना करते है कि देश से कोरोना महामारी समाप्त हो। उन्होंने बताया कि यह उत्सव 4 पीढ़ियों से होता आ रहा है। जिसमें मां सरयू को प्रातः भोग प्रसाद व देर शाम दिव्य आरती होती आ रही है। महंत राज कुमार दास कहा है कि जो भक्त गण भगवान में आस्था रखने वाले हैं।उन सभी लोगो और देशवासियों को माँ सरयू के पावन प्रकट उत्सव की बधाई। वही कहा कोरोना काल का प्रोटकाल मे देखते हुए सभी लोगो से आग्रह किया गया था। लेकिन फिर भी पर्याप्त मात्रा में लोग आए हैं।सरयू जी हम प्रार्थना करते है।कि कोरोना महामारी से जल्द से जल्द मुक्ति मिले। इस मौके सरयू के आरती के पर मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास,महंत राजकुमार दास, महंत रामदास नाका हनुमानगढ़ी आदि साधु समाज मौजूद रहें.दरसअल ग्रंथों में भी मां सरयू का विशेष वर्णन किया गया है माना जाता है कि महाराजा रघु की प्रार्थना पर महर्षि वशिष्ठ ने तपस्या करके ब्रह्मदेव को प्रसन्न कर मां सरयू को पृथ्वी पर अवतरित कराने का वरदान प्राप्त किया था। वहीं वर्णन में कहा गया है कि जब ब्रम्हदेव सृष्टि की रचना कर रहे थे तो उससे पहले ही ब्रह्मदेव ने भगवान विष्णु की तपस्या की थी और भगवान विष्णु ब्रह्म देव को दर्शन दिया था। दर्शन के बाद ब्रम्हदेव की तपस्या को देख भगवान विष्णु इतना खुश हो गए थे कि उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े थे। तभी ब्रह्मा जी ने ऑसुओं को अपने हाथों से रोक उसे मानसरोवर पर स्थापित किया था। इसीलिए सरयू को नेत्रजा भी कहा जाता है।

और पढ़े  हैवान’ प्रधानाचार्य: 3 मासूम बच्चियों से अश्लीलता, कोचिंग की आड़ में करता था घिनौनी करतूत, ऐसे खुला मामला

Spread the love
  • Related Posts

    राममंदिर में पहली बार बनेगा CEO पद, 2500 कर्मचारियों की होगी जिम्मेदारी,साथ ही मिलेंगे ये नए अधिकार

    Spread the love

    Spread the loveश्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पहली बार नियुक्त होने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को मंदिर के प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन की व्यापक जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ट्रस्ट का…


    Spread the love

    प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में HC में सुनवाई जारी, शाम तक आ सकता है आदेश

    Spread the love

    Spread the loveहाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में गंभीर संवैधानिक प्रश्न उठाए हैं।…


    Spread the love

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *