इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तीर्थ स्थलों, धार्मिक आयोजनों में होने वाली भगदड़ केवल प्रशासन की भीड़ प्रबंधन की विफलता का ही नहीं है बल्कि भीड़ के मनोविज्ञान के प्रति अज्ञानता का परिणाम है। इससे बचने के लिए सरकार को कानपुर, रुड़की की आईआईटी व अन्य विश्वविद्यालयों की मदद से वैज्ञानिक शोध करवाने और पाठ्यक्रम चलाने चाहिए।
इससे पहले कोर्ट ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण व प्रशासन से भीड़ प्रबंधन को लेकर हलफनामा तलब किया था। हलफनामे पर दी गई जानकारी से असंतुष्ट कोर्ट ने सरकार को विस्तृत सुझाव दिए। साथ ही अपने आदेश की प्रति अनुपालन व जानकारी के लिए मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, यूजीसी और भारत सरकार के उच्च शिक्षा सचिव को भी भेजने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि मथुरा, अयोध्या, वाराणसी और चित्रकूट जैसे हजारों वर्षों की धार्मिक विरासत वाले शहरों के लिए केवल दस साल का मास्टर प्लान बनाना गंभीर प्रशासनिक विफलता है। धार्मिक भीड़ की मनोविज्ञान और गतिविधियां राजनीतिक रैली या खेल आयोजनों की भीड़ से पूरी तरह अलग होती है, इसलिए इनके लिए अलग वैज्ञानिक नीति आवश्यक है।








