काम अधूरा है- 10 साल में भी नहीं बन पाई सिर्फ 4 किलोमीटर की एमआर-4, जुड़ेंगे तीन रेलवे और दो बस स्टेशन

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इंदौर में सड़कों का चौड़ीकरण तो हो रहा है, लेकिन नई सड़कें इक्का-दुक्का ही बन पा रही हैं। इनमें से एक है एमआर-4 सड़क। सिंहस्थ-2016 के समय इस सड़क को बनाने का काम शुरू हुआ था, लेकिन 10 साल में भी यह सड़क नहीं बन पाई। अब ढाई साल बाद उज्जैन में सिंहस्थ 2028 लगने वाला है। इस लिहाज से इस सड़क का बनना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस सड़क पर दो बस स्टेशन और तीन रेलवे स्टेशन हैं। 

इंदौर से उज्जैन जाने वाला ट्रैफिक इस सड़क से होकर गुजरेगा, लेकिन अभी भी इस सड़क के निर्माण में न शहर के जनप्रतिनिधि रुचि ले रहे हैं और न ही शहर के जिम्मेदार विभाग। आने वाले समय में शहर के ट्रैफिक को कम करने के लिए यह सड़क बहुत मददगार होगी। इस कारण इस सड़क की गंभीरता को समझना जरूरी है। 

 

50 हजार से ज्यादा वाहनों का ट्रैफिक संभावित
इस सड़क के लिए हुए सर्वे के अनुसार भविष्य में हर दिन 50 हजार से ज्यादा वाहन इस सड़क से होकर गुजरना संभावित हैं, क्योंकि इससे सीधे उज्जैन रोड़ जुड़ रहा है। अभी उज्जैन जाने के लिए परदेशीपुरा, आईटीआई मार्ग, चंद्रगुप्त मौर्य प्रतिमा चौराहा होकर जाना पड़ता है। आने वाले समय में सबसे तेज बसाहट सुपर काॅरिडोर में होगी। यहां बड़े माॅल, होटल बन रहे हैं। इस कारण एमआर-4 का उपयोग बढ़ जाएगा।

दो बस स्टेशन, तीन रेलवे स्टेशन जुड़े
एमआर-4 वैसे तो स्वदेशी मिल ब्रिज के नीचे से कुमेड़ी में बने नए अंतरराज्यीय बस स्टेशन तक बनना है, लेकिन स्वदेशी मिल से आगे यह सड़क सरवटे बस स्टेशन, ग्वालटोली रेलवे स्टेशन, पार्क रोड रेलवे स्टेशन से जुड़ी है। इसके अलावा लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन और इंटरस्टेट बस स्टेशन भी इस सड़क से जुड़ा है। यात्रियों के लिए यह सड़क सबसे ज्यादा उपयोगी है। इसके अलावा शहर के बाणगंगा, भागीरथपुरा, श्याम नगर, गौरीनगर, सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र, खातीपुरा जैसे इलाकों को भी यह जोड़ती है।

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पिछले सिंहस्थ तक दो लेन बनी
इंदौर रेलवे स्टेशन से बाणगंगा रेलवे क्रॉसिंग तक पिछले सिंहस्थ मेले के दौरान इंदौर विकास प्राधिकरण ने यह सड़क दो लेन बनाई थी। सिंहस्थ मद में इस सड़क को बनाने के लिए राज्य सरकार ने 12 करोड़ रुपये दिए थे। सड़क अधूरी बनी। तीन साल पहले इस सड़क को पूरा करने की जिम्मेदारी नगर निगम ने ली। इस सड़क के लिए सबसे बड़ी बाधा भागीरथपुरा बस्ती है। यहां 200 से ज्यादा निर्माण सड़क में बाधक है। इन्हें हटाना आसान नहीं होगा। छह माह पहले सड़क निर्माण में बाधक छह उद्योगों के निर्माण को तोड़ा गया। चार अन्य कारखानों की बाधा अभी बाकी है।

अब आगे क्या

  • इंदौर नगर निगम इस सड़क को अब 35 करोड़ रुपये में बना रहा है। इसके टेंडर भी जारी हो चुके हैं।
  • 200 से ज्यादा बाधक निर्माणों को तोड़ना होगा। इसके लिए जनप्रतिधियों को राजी करना होगा।
  • इस मार्ग से जुड़े दो रेलवे क्रॉसिंगों पर ब्रिज बनना शुरू हो चुके हैं। इसका काम भी डेढ़ साल में पूरा हो जाएगा।

शहर के लिए जीवन रेखा मार्ग साबित होगा 
शहर की कनेक्टिविटी के हिसाब से एमआर-4 काफी महत्वपूर्ण है। यह सड़क मध्य हिस्से को सुपर काॅरिडोर से जोड़ेगी। इस सड़क को 10 साल में बन जाना चाहिए था। सिंहस्थ में यह सड़क काफी उपयोगी साबित होगी।
– नागेश नामजोशी, इंदौर के विकास के मामलों के जानकार

बाधक निर्माण हटाएंगे
एमआर-4 सड़क को नगर निगम बना रहा है। इसके बाधक निर्माण हटाए जाएंगे। यह नई सड़क सिंहस्थ के लिए काफी महत्वपूर्ण है। नए बस स्टेशन के संचालन के बाद यह सड़क शहर के अंदरूनी हिस्से और पर्यटन स्थलों को जोड़ेगी। बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए यह सड़क सुविधानजनक होगी।
-पुष्य मित्र भार्गव, महापौर

एमआर-4 फैक्ट फाइल

  • एमआर-4 की लंबाई लगभग पौने तीन किलोमीटर और लागत 25 करोड़ है।
  • यह राजकुमार ब्रिज के नीचे और नेहरू पार्क के पास बन रहे रेलवे के नए स्टेशन और लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन को जोड़ेगी। इसके अलावा यह रोड एमआर-10 मार्ग पर बने नए बस स्टेशन से भी जुड़ेगी।
  • यह रोड दोनों स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक के समानांतर बनेगी। यही रोड लक्ष्मीबाई नगर से आगे सांवेर रोड को जोड़ेगी।
  • इस सड़क की चौड़ाई मास्टर प्लान में 45 मीटर है। फिलहाल इसे 30 मीटर में बनाया जा रहा है।
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