Poonawalla: तहसीन पूनावाला ने ई-20 ईंधन के खिलाफ खोला मोर्चा, भूख हड़ताल से पहले हाउस अरेस्ट का दावा

सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने शनिवार को आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें ग्रेटर कैलाश में हाउस अरेस्ट किया। यह कार्रवाई केंद्र सरकार की  ई-20 ईंधन नीति के खिलाफ उनके अकेले प्रदर्शन और भूख हड़ताल से पहले हुई। पूनावाला ने 27 जुलाई को एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग से गांधी स्मृति तक पदयात्रा और शुक्रवार को एक दिन की भूख हड़ताल की घोषणा की थी।

पूनावाला ने एक्स पर कई दृश्य साझा किए। उन्होंने दावा किया कि सुबह करीब 9.30 बजे पुलिस उनके घर पहुंची और उन्हें बाहर निकलने से रोका। पुलिस ने हिरासत के लिए कोई लिखित आदेश या दस्तावेज नहीं दिखाए। अधिकारियों ने कथित तौर पर बताया कि प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल हो सकते हैं, इसलिए उन्हें रोका जा रहा था। एक तस्वीर में पूनावाला ने पुलिस अधिकारी से बिना आदेश हिरासत में लेने पर सवाल किया। पुलिस अधिकारी ने जवाब दिया कि प्रस्तावित प्रदर्शन से कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती थी। पूनावाला ने एक्स पर आरोप लगाया कि उनके फ्लैट के बाहर जैमर लगाए गए थे, जिससे पत्रकारों को इंटरनेट सुविधा नहीं मिल रही थी।
विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
कार्यकर्ता ने शुक्रवार को अकेले प्रदर्शन करने का एलान किया था। इससे पहले, पुलिस ने 31 जुलाई को पार्लियामेंट तक उनके प्रस्तावित टीम भारत “गाड़ी मार्च” को अनुमति देने से मना कर दिया था। पूनावाला ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें मीडिया से बात करने से रोका। उन्होंने धमकी दी कि विरोध में शामिल नागरिकों को गिरफ्तार किया जा सकता है और उनकी गाड़ियां जब्त की जा सकती हैं। पूनावाला ने कहा था कि अकेले चलना और चुपचाप बैठना किसी कानून का उल्लंघन नहीं है।
ई-20 ईंधन नीति पर पूनावाला की मांग
पूनावाला ई-20 ईंधन नीति के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री नितिन गडकरी की आलोचना की है। उनकी मांग है कि उपभोक्ताओं को ई-20 ईंधन के बजाय ई-पांच और ई-10 ईंधन मिश्रण के साथ पारंपरिक पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिले। उनके समूह, टीम भारत, की मुख्य मांग है कि ईंधन स्टेशन 100 फीसदी पेट्रोल, ई-5 और ई-10 ईंधन बेचते रहें। केंद्र सरकार के ई- 20 पेट्रोल को विपक्षी नेताओं और उपभोक्ता समूहों ने भी आलोचना का सामना करना पड़ा है। पुरानी गाड़ियों के मालिकों का कहना है कि इससे ईंधन दक्षता कम होती है और रखरखाव का खर्च बढ़ता है।
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