ब्रिक्स के सफल सम्मेलन से पाकिस्तान को लगी मिर्ची, दुनियाभर के मीडिया ने दी प्रतिक्रिया

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ ही भारत वैश्विक कूटनीति के केंद्र में मजबूती से स्थापित हो गया है। एक तरफ जहां पाकिस्तान की पश्चिम एशिया और कूटनीतिक मंचों पर मध्यस्थता की महत्वाकांक्षाएं परवान नहीं चढ़ सकीं, वहीं नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत ने वैश्विक पटल पर ऐतिहासिक लकीर खींच दी।

शिखर सम्मेलन के दौरान विपरीत विचारों वाले देशों के मौजूदगी के बावजूद दिल्ली घोषणा पत्र पर पूर्ण सहमति बनना भारत की बड़ी जीत है। भारत की धरती पर ईरान और यूएई जैसे प्रतिद्वंद्वियों के शीर्ष प्रतिनिधियों की आमने-सामने की मुलाकात होना इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक शांति और संवाद के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है। पाकिस्तान अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश असफल रही है।
पाकिस्तान की नाकामी
पाकिस्तान ने दिसंबर 2023 में आर्थिक संकट से उबरने और कूटनीतिक दायरा बढ़ाने के लिए ब्रिक्स की पूर्ण सदस्यता हेतु आवेदन किया था। ब्रिक्स में किसी भी नए देश को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा सदस्य देशों की रजामंदी जरूरी है। हालांकि बीजिंग और मास्को के साथ इस्लामाबाद के संबंध ठीक हैं, लेकिन आम सहमति वाले नियम के कारण पाकिस्तान सफल नहीं हो सका।
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