कभी नक्सलियों का गढ़ रहा बस्तर संभाग अब पूरी तरह से नक्सलमुक्त हो चुका है। अब नक्सलियों की मांद में गोली नहीं बल्कि विकास की बयार बह रही है। अपना बस्तर बदल रहा है। ऐसे में जो नक्सली सरेंडर कर चुके हैं, उन्हें राज्य की साय सरकार मुख्यधारा से जोड़कर जीवन की नैया आगे बढ़ा रही है। उन्हें प्रोत्साहित कर रोजगार दे रही है। जीवकोपार्जन के तमाम साधन मुहैया करा रही है।
बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने स्वदेशी फैशन शो में एक प्रोफेशनल मॉडल की तरह रैंप वॉक किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क और अन्य हैंडलूम परिधानों का प्रदर्शन किया।
सरेंडर महिला नक्सलियों की यह प्रस्तुति मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ती महिलाओं के आत्मविश्वास, सम्मानजनक पुनर्वास और बदलते बस्तर की सकारात्मक तस्वीर की सशक्त अभिव्यक्ति रही।
छत्तीसगढ़ का कोसा और बस्तर की बुनाई प्रदेश के पारंपरिक हथकरघा उत्पाद देश-दुनिया में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की पहचान दिलाना है।
इसके लिए आधुनिक डिजाइन, कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, बाजार और नए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। ये बातें छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में कहीं।
इस दौरान सीएम ने हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का भी शुभारंभ किया। रैंप वॉक करने पर सुकमा के SP मयंक गुर्जर ने कहा कि हाल ही में नेशनल हैंडलूम डे पर, सुकमा में सरेंडर करने वाली नौ महिलाओं ने ‘स्वदेशी’ फैशन शो में हिस्सा लिया। उन्होंने एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। इन नौ महिलाओं में से कुछ ‘पामेड एरिया कमेटी’ में सक्रिय थीं। कुछ ने सीनियर नक्सल कमांडरों के लिए गनमैन के तौर पर काम किया, जिसमें बटालियन नंबर 1 के कमांडर भी शामिल थे। सरेंडर करने वाली महिलाओं में से एक ने ‘जनता सरकार’ स्कूल में टीचर के तौर पर भी काम किया था।
इस अवसर पर सीएम ने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के कई हितग्राहियों और मेधावी छात्र-छात्राओं को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान और पुरस्कार राशि बांटी।








