अयोध्या- हनुमानगढ़ी उज्जैनिया पट्टी के नए महंत बने संदीप दास और मोहित श्रीवास्तव को पट्टी का मुख्तार चुना गया।

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योध्या हनुमानगढ़ी पंचांग पट्टी उज्जैनिया के महंत संतराम दास महाराज के 27 जून को साकेतवास के बाद रामानंदी सनातन परंपरा के अनुसार सभी धार्मिक संस्कार विधिवत संपन्न किए गए। भंडारे के बाद अखिल भारतीय निर्वाणी अनी अखाड़ा के महासचिव महंत नंदराम दास महाराज के स्थान पर उज्जैनिया पट्टी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में उपस्थित नागा संतों ने सर्वसम्मति से झुंडी जमात के संत महंत संदीप दास महाराज को आजीवन उज्जैनिया पट्टी का महंत मनोनीत किया। वहीं मोहित श्रीवास्तव को पट्टी का मुख्तार चुना गया। बताया गया कि दिवंगत महंत संतराम दास महाराज डूंडा जमात से संबंधित थे। परंपरा के निर्वहन के क्रम में इस बार झुंडी जमात के महंत संदीप दास को यह दायित्व सौंपा गया। महंत संदीप दास, पूर्व गद्दीनशीन महंत रमेश दास महाराज के बड़े शिष्य हैं। हनुमानगढ़ी की पंचायती व्यवस्था के अनुरूप उज्जैनिया पट्टी के संतों ने
उनके नाम पर सहमति जताते हुए उन्हें पट्टी की बागडोर सौंपी। महंत पद ग्रहण करने के बाद संदीप दास महाराज ने कहा कि हनुमानगढ़ी की परंपराओं, नियम-नियमावली तथा पूर्व महंतों द्वारा स्थापित मर्यादाओं का पूर्ण पालन करते हुए पट्टी के कार्यों का संचालन किया जाएगा। अखिल भारतीय निर्वाणी अनी अखाड़ा के महासचिव महंत नंदराम दास महा राज ने कहा कि महंत संतराम दास महाराज के साकेतवास के बाद सभी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए संत समाज ने सर्वसम्मति से महंत संदीप दास को जिम्मेदारी
सौंपी है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में उज्जैनिया पट्टी की आ व्यवस्थाएं अधिक सुदृढ़ होंगी। महंत संदीप दास के गुरुभाई महंत कल्याण दास महाराज ने कहा कि गुरुदेव साकेतवासी गद्दीनशीन महंत स्व रमेश दास महाराज के आशीर्वाद से बड़े गुरुभाई को दायित्व मिला है। कि बैठक में नवनियुक्त महंत का संतों ने पुष्पमालाओं से स्वागत किया।
पट्टी के मुख्तार पद पर चुने गए मोहित श्रीवास्तव ऐसे परिवार से आते हैं, जो लगभग तीन शताब्दियों (300 वर्षों) से हनुमानगढ़ी के पट्टी की सेवा एवं प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। संत समाज ने उनके परिवार की दीर्घकालीन सेवाओं, अनुभव और परंपरा को देखते हुए सर्वसम्मति से उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। उनके चयन को उज्जैनिया पट्टी की ऐतिहासिक विरासत और सतत सेवा परंपरा की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
महंत धर्मदास (सरपंच), सं महंत रामकुमार दास, वरिष्ठ पुजारी नि रमेश दास, राजू दास सहित उज्जैनिया शे पट्टी के सैकड़ों संत, महंत और नागा में साधु उपस्थित रहे।

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