तहसील कार्यालय के कर्मचारियों को टिफिन पहुंचाने वाली मीनाक्षी शर्मा आज डिप्टी कलेक्टर बन गई हैं। मीनाक्षी बताती हैं कि स्कूल और कॉलेज के दिनों में वह अपनी मां के टिफिन सेवा के काम में हाथ बंटाते हुए तहसील समेत कई सरकारी कार्यालयों में टिफिन पहुंचाती थीं।
उस समय शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि एक दिन वही लड़की प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर एसडीएम के पद पर पहुंचेगी और जिन कर्मचारियों को वह टिफिन देती थी, वे उसके अधीन कार्य करेंगे। संघर्ष से सफलता तक का यह सफर आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
प्रगति विहार निवासी मीनाक्षी शर्मा ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) की परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण कर डिप्टी कलेक्टर बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और पारिवारिक संघर्ष की लंबी कहानी छिपी है।
प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना लेकर मीनाक्षी ने पूरी एकाग्रता के साथ तैयारी की। उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से अध्ययन किया और चार वर्षों तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। उनका मानना है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए समय का सही उपयोग और आत्मअनुशासन बेहद जरूरी है।
मीनाक्षी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन अंतिम चयन से मात्र पांच अंकों से चूक गईं। हालांकि उन्होंने इसे असफलता नहीं बल्कि सीख माना और उसी अनुभव के आधार पर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना साकार कर लिया।










