नोएडा और ग्रेटर नोएडा में श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले 24 कारखानों से जुड़े 203 ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त करने, राशि की वसूली करने और एजेंसियों को काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने बताया कि श्रमिकों के उपद्रव में कई ठेकेदारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। वहीं, श्रम कानूनों का पालन नहीं करने पर ठेकेदारों के खिलाफ 1.16 करोड़ रुपये की पेनल्टी के नोटिस जारी किए गए हैं।
अन्य ठेकेदारों की भी जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बताया गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों के श्रमिकों के वेतन में 21 फीसदी की वृद्धि की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, नोएडा में बवाल शुरू होने के बाद दिल्ली के एक विश्वविद्यालय के छात्रों का एक गुट वहां पहुंचा, जिसने मजदूरों के गुस्से को भड़काया। इस गुट ने ही गाड़ियों में आग लगाई और पुलिस को निशाना बनाया।
जांच में यह भी सामने आया कि इसी गुट ने हरियाणा के मानेसर में बीती 9 अप्रैल को हुए प्रदर्शन के दौरान लोगों को भड़काने का प्रयास किया था ताकि औद्योगिक क्षेत्र में दंगा भड़क जाए। एसटीएफ इस मामले में तमाम ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप को खंगाल रही है, जिनके जरिये मजदूरों को भड़काया गया था।








