देहरादून- दुर्गम क्षेत्रों का पहले तैयार किया नक्शा, मकान गणना हुई आसान, जनगणना निदेशक ने बताई ये खास बातें

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प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में जनगणना शुरू होते ही सबसे पहले नक्शा तैयार किया गया, इससे जनगणना का पहला चरण आसान हो गया है। इसके बावजूद अगर कहीं आपदा जैसे हालात बने तो संबंधित जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की तत्काल मदद ली जाएगी।

प्रदेश में चल रहे जनगणना के पहले चरण के तहत अमर उजाला के प्रमुख संवाददाता से बातचीत में निदेशक जनगणना इवा आशीष श्रीवास्तव ने अहम सवालों के जवाब दिए। पेश हैं कुछ अंश। 

सवाल : उत्तराखंड के कई इलाके बेहद दुर्गम और पहाड़ी हैं। क्या इन सभी क्षेत्रों में जनगणना का काम एक साथ शुरू हो पाया है?

जवाब : हां, राज्य के सभी जिलों और उनके अंतर्गत आने वाले सभी चार्जों में 25 अप्रैल से कार्य शुरू हो चुका है। शुरुआत के तीन दिनों में प्रगणकों ने अपने आवंटित क्षेत्रों का भ्रमण कर एक नजरी नक्शा तैयार किया। इसके बाद अब मकानों के सूचीकरण और आंकड़े जुटाने का काम गति पकड़ चुका है।

 

सवाल : पलायन के कारण उत्तराखंड में कई घर खाली पड़े हैं। ऐसे गांवों या खाली घरों के लिए मकान गणना का क्या प्रावधान है?

जवाब : इस चरण में हमारा मुख्य उद्देश्य मकानों को सूचीकरण करना है। चाहें घर खाली हो, कोई वहां रह रहा हो या वह गैर-आवासीय (दुकान, गोदाम) हो, राज्य के सभी प्रकार के मकानों का पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जा रहा है।

सवाल : इस बार की जनगणना को डिजिटल जनगणना कहा जा रहा है। तकनीकी तौर पर यह पिछली बार से कितनी अलग है?

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जवाब : इस बार तकनीकी का व्यापक स्तर पर उपयोग हो रहा है। एचएलबीसी पोर्टल के माध्यम से पूरे राज्य को 29,622 ब्लॉक्स में बांटकर प्रगणकों को डिजिटल नक्शे दिए गए हैं। आंकड़ों को एकत्र करने के लिए एंड्रॉयड और आईओएस दोनों के लिए विशेष एचएलओ मोबाइल एप तैयार किया गया है। इसके अलावा सीएमएमएस पोर्टल है, जिसे आप जनगणना का मस्तिष्क कह सकते हैं। इसी पोर्टल से प्रगणकों, सुपरवाइजर को कार्य आवंटन, परिचयपत्र, नियुक्तिपत्र जारी होने से लेकर प्रगणकों की कार्य प्रगति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।

सवाल : फील्ड स्टाफ को एप चलाने में कोई दिक्कत न आए, क्या उन्हें इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है?

जवाब : बिल्कुल। इसके लिए त्रिस्तरीय प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें प्रगणकों को एप और पोर्टल पर हैंड्स ऑन प्रैक्टिस कराने के साथ-साथ फील्ड पर ले जाकर मॉक ड्रिल भी करवाई गई है।

सवाल : यदि कोई परिवार 24 मई तक अपने घर पर उपलब्ध नहीं है तो क्या उनका डाटा छूट जाएगा?

जवाब : नहीं, इसके लिए प्रावधान है। यदि परिवार का कोई भी सदस्य 30 दिन की इस अवधि में एक भी दिन घर पर मौजूद है तो वे प्रगणक को जानकारी दे सकते हैं लेकिन अगर पूरे समय घर पर कोई नहीं मिलता, तो उसे लॉक्ड (ताला बंद) श्रेणी में दर्ज किया जाएगा। जनसंख्या के मुख्य आंकड़े दूसरे चरण के आधार पर जारी होते हैं। प्रथम चरण का लक्ष्य केवल उन स्थानों को चिह्नित करना है, जहां दूसरे चरण में लोग मिल सकते हैं।

सवाल : सीमावर्ती क्षेत्रों और आपदा संभावित इलाकों के लिए क्या सुरक्षा उपाय या बैकअप प्लान है?

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जवाब : सीमावर्ती गांवों के सामान्य निवासियों की गणना सामान्य प्रक्रिया के तहत ही हो रही है। रही बात मिलिट्री या पैरा-मिलिट्री यूनिट्स की तो उनकी गणना केवल दूसरे चरण में की जाती है। आपदा के संबंध में, फिलहाल मौसम अनुकूल है लेकिन किसी भी आपात स्थिति में जिला प्रशासन अपनी व्यवस्था के माध्यम से जनगणना कार्य संपन्न कराएंगे।

सवाल : कई नगर निगमों और जिलों में काम की रफ्तार काफी सुस्त है। क्या निदेशालय इस पर कोई एक्शन लेगा?

जवाब : शुरुआत में प्रगणक नक्शे तैयार कर रहे थे, इसलिए काम थोड़ा धीमा लगा। निदेशालय ने इसका संज्ञान लिया और सभी चार्ज अधिकारियों को तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। लिहाजा, सात 2026 तक राज्य के 18,699 ब्लॉक्स में काम सक्रिय रूप से शुरू हो चुका है।

सवाल : यदि आम जनता को जनगणना से जुड़ी कोई समस्या या सवाल हो तो वे कहां संपर्क करें?

जवाब : हमने एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर 1855 जारी किया है। इस पर सोमवार से शुक्रवार सुबह नौ से शाम छह बजे के बीच कॉल करके कोई भी जानकारी ली जा सकती है।


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