कर्णप्रयाग झड़प मामला: जमानत मिलने के बाद पांवटा साहिब पहुंचे निहंग सिख, गुरुद्वारे में टेका माथा

त्तराखंड के कर्णप्रयाग में हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान हुई हिंसक झड़प के मामले में जमानत मिलने के बाद आरोपी निहंग सिख शनिवार को हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब पहुंचे। यहां उन्होंने अरदास कर माथा टेका और गुरु साहिब का आशीर्वाद लिया। इस दौरान विभिन्न सिख संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मौजूद रहे।

 

यह घटनाक्रम उस विवाद के बाद हुआ जो 16 जून को कर्णप्रयाग क्षेत्र में हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान वाहन पार्किंग को लेकर स्थानीय लोगों और कुछ श्रद्धालुओं के बीच शुरू हुआ था। यह विवाद बाद में हिंसक झड़प में बदल गया था, जिसके चलते पुलिस ने कुछ निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई।

 

आपसी भाईचारे और रिहाई के प्रयास : उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सभी पक्षों द्वारा आपसी भाईचारा बनाए रखने और गिरफ्तार निहंग सिखों की रिहाई सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर मामले से अवगत कराया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने डीजीपी, एसएसपी, एसपी सहित संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। नामधारी ने कहा कि कुछ शरारती तत्वों ने माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया था, लेकिन सरकार और प्रशासन ने स्थिति को संवेदनशीलता से संभाला। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री और प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

 

सिख संगठनों की भूमिका और कानूनी सहायता : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के महासचिव एवं विधिक प्रमुख सरदार जगदीप सिंह कहलों ने बताया कि कर्णप्रयाग मामले में मनप्रीत सिंह, जसनप्रीत सिंह, अजय सिंह और सतविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी रिहाई के लिए पूरे सिख पंथ ने आवाज उठाई। डीएसजीएमसी ने भी मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर कानूनी प्रक्रिया के तहत उनकी रिहाई का आग्रह किया था। कहलों ने उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन के सहयोग के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।

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खालसा पंथ की एकजुटता और सहयोग: दशमेश तरना दल के मुख्य जत्थेदार बाबा मेजर सिंह सोढ़ी ने बताया कि रिहा हुए निहंग सिखों को विशेष रूप से पांवटा साहिब लाया गया, जहां उन्होंने गुरुद्वारा साहिब में अरदास की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूरे खालसा पंथ ने इस मामले में एकजुटता दिखाई। बाबा मेजर सिंह सोढ़ी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सहयोग की भी सराहना की।

 

रिहा हुए निहंग सिखों ने जताया आभार : जमानत मिलने के बाद रिहा हुए निहंग सिखों ने भी गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब में माथा टेकने के बाद सभी धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों का आभार व्यक्त किया। एक निहंग सिख ने विशेष रूप से बाबा मेजर सिंह का धन्यवाद किया, जो उन्हें लेने पांवटा साहिब पहुंचे और सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं।

 

घटना का संक्षिप्त विवरण : यह पूरा मामला 16 जून को उत्तराखंड के कर्णप्रयाग क्षेत्र में हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान वाहन पार्किंग को लेकर उपजे विवाद से जुड़ा है। स्थानीय लोगों और कुछ श्रद्धालुओं के बीच शुरू हुआ यह विवाद जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने कुछ निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था। बाद में, उन्हें अदालत से जमानत मिल गई, और अब वे घटना के बाद शांति और आशीर्वाद के लिए पांवटा साहिब पहुंचे हैं।

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