उत्तराखंड- पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का हार्ट अटैक से निधन

उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट(81) का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके निधन से कांग्रेस समेत सभी बशोक की लहर है।

हीरा सिंह बिष्ट पूरे जीवन कांग्रेस के लिए समर्पित रहे। उन्होंने अविभाजित उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं। साथ ही वह इंटक के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व सीएम हरीश रावत, प्रीतम सिंह, डॉक्टर हरक सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना समेत पार्टी के कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया।

छात्र संघ अध्यक्ष से की थी राजनीति की शुरुआत

सत्तर के दशक की शुरुआत में पश्चिम उत्तरप्रदेश के सबसे बड़े महाविद्यालय डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून के छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले हीरा सिंह बिष्ट  युवा कांग्रेस से होते हुए उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड के प्रमुख स्तंभ रहे। इंटक के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक कर्मचारियों व श्रमिकों के हितों के लिए भी संघर्ष करते रहे।

छात्र राजनीति से निकलकर उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दामन थामा और शीघ्र ही एक प्रभावशाली युवा नेता के रूप में स्थापित हुए। वर्ष 1985 में वे देहरादून विधानसभा क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने 2002 में राजपुर विधानसभा तथा 2014 में डोईवाला विधानसभा उपचुनाव जीतकर कुल तीन बार विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया।

वे उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रहे और परिवहन, श्रम एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों का सफलतापूर्वक दायित्व संभाला। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी उन्होंने कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भूमिका

हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानियों में रहे। उन्होंने पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को जन-जन तक पहुंचाने, जनआंदोलनों का नेतृत्व करने व राज्य निर्माण के संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई। उनका मानना था कि पर्वतीय क्षेत्रों का विकास तभी संभव है जब उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा मिले।

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