शाहजहांपुर- कोलाघाट पुल शुरू करने को लेकर अनिश्चितकालीन धरना,200 से अधिक गांव के लोग हैं प्रभावित 

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शाहजहांपुर- कोलाघाट पुल शुरू करने को लेकर अनिश्चितकालीन धरना,200 से अधिक गांव के लोग हैं प्रभावित 

शाहजहांपुर में 3 साल बाद भी कोलाघाट पुल वाहनों के लिए खोला नही गया। सिर्फ दो पहिया वाहनों को ही इस पुल से गुजरने की इजाजत है। तहसील कलान के रहने वाले लोगों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। स्थानीय लोगों लगातार पुल को शुरू कराने की मांग कर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार को सपा के आंवला सांसद के साथ जिले के तमाम सपा नेताओं ने पुल के पास जोरदार प्रदर्शन किया। सपाइयों ने अनिश्चितकालीन धरना दे रहे लोगों को समर्थन किया है। उनकी मांग है कि पुल का लोड टेस्ट कराकर सभी वाहनों के लिए पुल को खोला जाए। सपा सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आने वाली सरकार समाजवादी पार्टी की है। तब हम पुल तो बनवा लेंगे, लेकिन जनता भाजपा से इसका हिसाब लेगी। 

जलालाबाद में लगभग दो किलोमीटर लंबा कोलाघाट पुल तीन साल पहले तीन हिस्सो में बटकर गिर गया था। उसके बाद कलान तहसील वासियों का मुख्यालय से पूरी तरह से संपर्क टूट गया था। उसके बाद पैटुल पुल बनाया गया लेकिन बाढ़ आने से पैटुल पुल भी बंद कर दिया गया। इस दौरान पुल की मरम्मत हुई, लेकिन जांच में सामने आया। पुल कमजोर है। उसको वाहनों के लिए खोला नही जा सका। अब इस पुल को सिर्फ दो पलिया वाहनों के लिए खोला गया है। सिर्फ एक बार में एक बाइक ही निकल सकती है। ऐसे में कलान तहसील में रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य से लेकर अन्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग पिछले कई दिन से पुल का लोड टेस्ट कराकर पुल का आवागमन शुरू करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी से आंवला विधायक नीरज मौर्य ने तिलहर विधानसभा से पूर्व विधायक रोशनलाल वर्मा और कार्यकर्ताओं के साथ अनिश्चितकालीन धरने में पहुंचकर उनका समर्थन किया है। उनकी मांग है कि कलान वासियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पुल ठीक नही होने के कारण कलान में रहने वाले मरीजों को शाहजहांपुर लाने के बजाए उनको फर्रुखाबाद ले जाना पड़ता है। अगर कलान वासियों को शाहजहांपुर मुख्यालय आना होता है तो उनको ज्यादा सफर तय करना पड़ता है। उनकी मांग है कि कोलाघाट पुल का लोड टेस्ट कराकर जल्द उसके उपर सभी वाहनों का आवागमन शुरू कराया जाए। 

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बता दें कि 1992 में सपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कोलाघाट पुल का शिलान्यास किया था। राजनीति होने पर मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। 2003 में जब मुलायम सिंह यादव फिर से मुख्यमंत्री बने तो लटकी फाइलें आगे बढ़ाई गईं। 2006 में पुल का निर्माण शुरू हुआ। लेकिन 2007 में सपा सरकार चली गई। फिर बसपा की सरकार आई और मायावती मुख्यमंत्री बनी। 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती नज लखनऊ में इसका उद्घाटन किया था। 2021 में पुल टूटकर गिर गया। 

बता दें कि तीन साल में कोलाघाट पुल शुरू नही कर पाना सत्ता पक्ष के नेताओं के लिए सबसे बड़ा सवाल है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर और करीब दो साल तक जितिन प्रसाद पीडब्ल्यूडी मंत्री रहे। जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष, छह विधानसभाओं के सभी विधायक भाजफा के हैं। राज्यसभा से लेकर लोकसभा सांसद और एमएलसी भी भाजपा के हैं। शाहजहांपुर जिले में ये मंत्री और नेता मौजूद हैं। बावजूद इसके तीन साल पहले टूटे पुल को जनता के लिए शुरू नही कराया जा सका।


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