हल्द्वानी: पुष्पा से अब बने धुरंधर-: सिनेमा के हिट फॉर्मूले से उत्तराखंड की सियासत साध गए रक्षा मंत्री  राजनाथ, दिया संकेत

क्षा मंत्री राजनाथ सिंह एक बार फिर सिनेमा के फॉर्मूले से कुमाऊं के सियासी मंच पर सबका ध्यान खींचा। फर्क सिर्फ इतना कि चार साल पहले उन्होंने पुष्पा फिल्म का हिट फॉर्मूला इस्तेमाल किया और शनिवार को धुरंधर का जिक्र कर उत्तराखंड की सियासत साध गए।

 

हमारा पुष्कर फ्लावर भी है और फायर भी
राजनाथ सिंह ने 8 फरवरी 2022 को पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट की जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि हमारा पुष्कर फ्लावर भी है और फायर भी है। तब की हिट फिल्म पुष्पा के डायलॉग को जोड़ते हुए यह बात कही गई थी। इसका गूढ़ अर्थ लोगों को तब समझ में आया, जब चुनाव हारने के बावजूद धामी को दोबारा सरकार की कमान मिली।

फिर सिनेमा का फॉर्मूला अपनाया
चार साल बाद अब 21 मार्च 2026 को राजनाथ सिंह ने हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज के मैदान में सीएम धामी की मौजूदगी में फिर सिनेमा का फॉर्मूला अपनाया। इस बार उन्होंने मौजूदा दौर की हिट फिल्म धुरंधर से मुख्यमंत्री का नाम जोड़ा। सिनेमा के लोकप्रिय तत्व को राजनीतिक संकेत में बदलते हुए उन्होंने भीड़, कार्यकर्ताओं और भविष्य की सियासी दिशा तीनों के लिए लकीर खींच दी।

स्पष्ट राजनीतिक संकेत 
राजनाथ सिंह का यह प्रयोग अनायास या आकस्मिक नहीं है। इसके स्पष्ट राजनीतिक संकेत नजर आते हैं। इसे 2027 के विधानसभा चुनाव में पुष्कर धामी को फिर से मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने की रणनीतिक स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। पुष्पा का फायर शब्द एक उभरते, जुझारू और आक्रामक नेतृत्व का प्रतीक था जबकि धुरंधर अनुभव, स्थायित्व और भरोसे का संकेत देता है। संदेश साफ है कि सीएम को अब केवल संभावनाओं का नेता नहीं, बल्कि परिणाम देने वाले नेता के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

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तब : 8 फरवरी 2022
चुनावी माहौल में पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट में उन्होंने तब की सुपरहिट फिल्म पुष्पा का सहारा लिया। यह संवाद धामी को आक्रामक, ऊर्जा से भरे और संभावनाशील नेता के रूप में स्थापित करने की राजनीतिक ब्रांडिंग साबित हुई।

अब : 21 मार्च 2026
हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज मैदान में वही शैली नए संदर्भ के साथ सामने आई। लोगों के जेहन में दर्ज धुरंधर का इस्तेमाल हुआ। राजनाथ सिंह ने धुरंधर धामी संबोधन किया। फायर से धुरंधर तक यह केवल विशेषण का नहीं, बल्कि सशक्त राजनीतिक सफर जताने का माध्यम रहा।

तारीफ में तथ्यों को तरजीह
अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने केवल विशेषणों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने सैनिक कल्याण, महिला सशक्तिकरण, समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून और आधारभूत विकास जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए सरकार के कामकाज को भी मजबूती से रखा। यह दोहरी रणनीति है। एक तरफ सिनेमा और रूपक से भावनात्मक अपील, दूसरी तरफ ठोस कामकाज का ब्यौरा। यही संतुलन किसी भी राजनीतिक संदेश को प्रभावी बनाता है।

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