जीएसटी जांच विभाग उत्तराखंड- अधिकारियों ने फर्जी कंपनियां बनाकर पकड़ा, 150 करोड़ का GST घोटाला

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त्तराखंड जीएसटी जांच विभाग ने टैक्स चोरी पकड़ने के लिए एक अनोखा ऑपरेशन चलाया है। अधिकारियों ने खुद कई फर्जी कंपनियां बनाईं ताकि एक संदिग्ध कंपनी के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित कर 150 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का पर्दाफाश किया जा सके। इस पूरी योजना को अमलीजामा पहनाने और दोषी कंपनी का भरोसा जीतने में अधिकारियों को कई महीने लगे। चार महीने की गहन जांच के बाद विभाग ने कंपनी के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में इंटेलिजेंस, इनकम टैक्स, ऊर्जा मंत्रालय और एआई तकनीक का भी सहारा लिया गया।

 

कुमाऊं क्षेत्र के विशेष जांच ब्यूरो के संयुक्त आयुक्त रोशन लाल ने बताया कि सितारगंज स्थित यह कंपनी ट्रांसफार्मर की आपूर्ति करती थी। जांच में सामने आया कि यह कंपनी अपनी उन फर्मों के नाम पर खरीद-बिक्री कर रही थी जिन्हें वह बहुत पहले बंद कर चुकी थी। राज्य कर विभाग की नजर सितारगंज स्थित सिडकुल की टीए प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पर चार महीने से थी। कंपनी का हैंडलर प्रदेश से बाहर का बताया जा रहा है। विभाग का संदेह तब गहराया जब पहली कंपनी बंद होने के बाद भी चल रही थी। माल खरीदने के साक्ष्य भी मिलने लगे। उच्च स्तरीय टीम ने आश्वस्त होने के बाद पूरा नेटवर्क बिछाया और कई विभागों व तकनीकों की मदद ली। 32 अधिकारियों की टीम ने इनपुट एकत्र किए। कंपनी 2017 से चल रही थी लेकिन बाद में पहली कंपनी बंद कर दी गई। इसके बाद दूसरी कंपनी खोलकर पहली कंपनी से भी चोरी-छिपे काम शुरू कर दिया गया। विभाग को पुख्ता प्रमाण मिलने पर इंटेलिजेंस, जीएसटी पोर्टल, इनकम टैक्स, बैंक और ऊर्जा मंत्रालय के टेंडर आदि से डेटा मिलान कर जांच शुरू की गई।

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