पूर्व सीएम हरीश रावत करेंगे पंचायत चुनाव में धांधली के खिलाफ न्याय यात्रा..

 

 पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पंचायत चुनाव में पिछले दिनों जो कुछ हुआ उसे लेकर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा, भाजपा ने चुनाव में शुरू से अब तक जितने भी गलत हथकंडे हो सकते थे सब अपनाएं। इसके खिलाफ वह सितंबर से प्रदेशभर में न्याय यात्रा शुरू कर जनता की अदालत में जाएंगे। वहीं, देहरादून या नैनीताल में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

कांग्रेस भवन में मीडिया से हुई वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर आरोप लगाया कि धामी सरकार ने धन बल, पुलिस, प्रशासन और गुणा तत्वों के समन्वय से जिला और क्षेत्र पंचायत सदस्यों का अपहरण किया। नैनीताल, द्वाराहाट, बाजपुर, बेतालघाट में इस तरह की घटनाएं हुई। पूर्व सीएम ने कहा, लोकतंत्र अपनी विभिन्न संस्थाओं से गतिमान व्यवस्था है।

भाजपा इन सभी संस्थाओं की गतिमान व्यवस्था पर कब्जा कर रही है। पहले चुनाव लटकाए गए, जब हाईकोर्ट के रुख को देखते हुए चुनाव कराने पड़े तो पहले ही दिन से पंचायत चुनावों के लिए षड्यंत्र रच दिया गया। आरोप लगाया कि पहले भाजपा ने आरक्षण के चक्र को सुनियोजित तरीके से गड़बड़ाया। पंचायतों में आरक्षण घोषित किया गया, लेकिन जिला पंचायतों में आरक्षण को छोड़ दिया गया। हमने तभी सत्ता की मंशा पर संदेह जताया था। जो अब सही साबित हुई है।

 

आदेश निकालकर विधानमंडल का अपमान किया 
चार जिलों में जिला पंचायत अध्यक्षों के आरक्षण को नियमों के विपरीत तय किया गया। पंचायती राज एक्ट 2016 में स्पष्ट है कि एक से अधिक नामांकन किए जाने की स्थिति में नामांकन खारिज होगा, लेकिन चुनाव आयोग ने मतदान की अनुमति देने के लिए विशेष आदेश निकाला। इससे साफ है कि आयोग एक्ट से भी ऊपर हो गया। उसने इस तरह का आदेश निकालकर विधानमंडल का अपमान किया है।

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उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा, पुलिस और प्रशासन ने सत्तारुढ़ दल के लिए वोट जुटाने का काम किया है। राज्य में कई क्षेत्रों में पुलिस और प्रशासन के बल पर चुने हुए जनप्रतिनिधियों का अपहरण करके परिणाम जबरन अपने पक्ष में कराए गए। नैनीताल में घटी घटना को सारे देश में देखा है कि कैसे लोग जबरदस्ती हथियारों के बल पर मतदाताओं को उठाकर ले गए।

धारचूला में सवर्ण महिला को अनुसूचित जाति सीट पर लड़ाया

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, धारचूला में नेपाली, भारतीय नागरिक नहीं हैं फिर भी नेपाल की सवर्ण महिला को अनुसूचित जाति सीट पर चुनाव लड़ाया गया। सब जानते हैं कि जातियां जन्म से होती हैं, विवाह से नहीं होती। इसके अलावा रुद्रप्रयाग में भी चुनाव में बड़ी साजिश हुई है। वहां, मुकाबला बराबरी का न हो जाए इसके लिए अंतिम समय में पैन ही बदल दिया गया।

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