शेयर बाजार में गिरावट- डॉलर के मुकाबले रुपया आज 151 पैसे मजबूत,सेंसेक्स 1400 अंक से अधिक गिरा, निफ्टी 22250 से नीचे

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भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को बुरी तरह धराशायी हो गए। सेंसेक्स लगभग 1300 अंकों से अधिक गिर गया और निफ्टी बुधवार की बढ़त के बाद 22,250 से नीचे आ गया। निवेशकों ने अन्य कारणों के साथ-साथ ईरान-अमेरिका युद्ध में ट्रंप की टिप्पणियों पर रिएक्शन दिया, जिससे बेंचमार्क पिटते दिखे। सुबह 9.39 बजे सेंसेक्स 1,394.38 (-1.90%) अंक टूटकर 71,739.94 पर जबकि निफ्टी 407.75 (1.80%) अंक फिसलकर 22,271.65 पर कारोबार करता दिखा। इस दौरान बैंकिंग और फार्मा सेक्टर के शेयरों में तेज बिकवाली दिखी।

 

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग दो प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार सुबह के कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसईसेंसेक्स 1,433.72 अंक या 1.96 प्रतिशत लुढ़ककर 71,700.60 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई  निफ्टी 445.70 अंक या 1.97 प्रतिशत का गोता लगाकर 22,233.70 के स्तर पर पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि इसके ठीक एक दिन पहले बुधवार को सेंसेक्स 1,186.77 अंकों की छलांग के साथ 73,134.32 पर और निफ्टी 348 अंक चढ़कर 22,679.40 पर बंद हुआ था।

बाजार की इस भारी गिरावट के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव सबसे बड़ा कारक है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, “राष्ट्रपति ट्रंप की इस घोषणा के बाद कि ‘हम अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़ा प्रहार करने जा रहे हैं’, बाजार की धारणा फिर से नकारात्मक हो गई है”।

इस सैन्य तनाव के डर से ऊर्जा बाजार में भी भारी हलचल है:

 

    • कच्चा तेल: वैश्विक तेल बेंचमार्क ‘ब्रेंट क्रूड’ लगभग 4.44 से 5 प्रतिशत की तेजी के साथ 105.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
  • बॉन्ड यील्ड और कमोडिटी: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.36 प्रतिशत हो गई है, जिसका सोने और चांदी की कीमतों पर मामूली नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
  • विदेशी फंड्स की निकासी: एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी बिकवाली की, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,171.80 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की।
और पढ़े  US-Iran: ईरान से समझौते की उम्मीद, होर्मुज जल्द खुलने का दावा, यूरेनियम पर भी राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा बयान

प्रमुख कंपनियों और एशियाई बाजारों पर असर
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियां नुकसान में कारोबार कर रही थीं। सबसे ज्यादा पिछड़ने वाले प्रमुख शेयरों में सन फार्मा, इंडिगो, अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, लार्सन एंड टुब्रो, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक और पावरग्रिड शामिल रहे।

इसका असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिकी बाजार बुधवार को भले ही बढ़त के साथ बंद हुए हों, लेकिन गुरुवार को व्यापक एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4.31 प्रतिशत, जापान का निक्केई 2.24 प्रतिशत, हांगकांग का हैंगसेंग 1.04 प्रतिशत और शंघाई का कंपोजिट इंडेक्स 0.53 प्रतिशत गिर गया।

आगे का आउटलुक
वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर भारतीय रुपये और घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। विशेषज्ञ वीके विजयकुमार ने आगाह किया है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमत, बढ़ता व्यापार घाटा, घटते रेमिटेंस (प्रेषण) की आशंका और लगातार एफपीआई (एफपीआई) बिकवाली रुपये पर भारी दबाव डाल रहे हैं। डॉलर वायदा सौदों पर आरबीआई (आरबीआई) के प्रतिबंधों के बावजूद यह दबाव कम नहीं हो रहा है। आगे चलकर बाजार और अर्थव्यवस्था की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के सैन्य घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।


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