Euthanasia: सम्मानजनक मौत के लिए हरीश संग डॉक्टर लड़ रहे जिंदगी से जंग, अब ऐसी है स्थिति

म्स के एक शांत वार्ड में जिंदगी और मौत के बीच ठहरी एक लंबी प्रतीक्षा चल रही है। हरीश राणा अब शब्दों से परे एक ऐसी अवस्था में हैं, जहां हर निर्णय संवेदनाओं, कानून और चिकित्सा की सीमाओं के बीच संतुलन साध रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत डॉक्टरों की टीम बेहद सतर्कता से उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए है। 

मशीनों से हटकर सामान्य बेड तक का सफर जितना चिकित्सकीय है, उतना ही भावनात्मक भी, जहां पास खड़े माता-पिता की आंखों में उम्मीद, पीड़ा और स्वीकार्यता, तीनों एक साथ झलक रहे हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, फिलहाल हरीश राणा की हालत स्थिर है।

 

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, पैसिव यूथेनेशिया के तहत चरणबद्ध तरीके से हरीश राणा का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जा रहा है। कुछ दिन पहले पेट में लगी पोषण नली को बंद कर दिया गया था। हालांकि, डॉक्टर अभी उनके दिमाग को दी जाने वाली दवाइयां दे रहे हैं।

 

यह प्रक्रिया मेडिकल प्रोटोकॉल और विशेषज्ञों की निगरानी में की जा रही है। हरीश की मां लगातार उनके साथ रहती हैं जबकि पिता, भाई और बहन समय-समय पर मुलाकात करने आते हैं। इस दौरान डॉक्टर लगातार उनकी शारीरिक स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। 

यदि किसी चरण में कोई चिकित्सा जटिलता सामने आती है, तो उसके अनुसार उपचार या प्रक्रिया में बदलाव भी किया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह समय-सीमा एक अनुमान है। हर मरीज की स्थिति अलग होती है और उसी के अनुसार प्रक्रिया की गति भी तय होती है।
पैलिएटिव केयर में मौत को तेज नहीं किया जाता’
अस्पताल के पूर्व पैलिएटिव विशेषज्ञ डॉ. सुशमा भटनागर के अनुसार, पैलिएटिव केयर में मौत को तेज नहीं किया जाता, बल्कि दर्द-तकलीफ कम कर प्राकृतिक मौत की अनुमति दी जाती है। फोकस मरीज की आराम और गरिमा पर है।
भारत के पहले निष्क्रिय इच्छामृत्यु को लागू करने के लिए डॉ. सीमा मिश्रा की अध्यक्षता में एक विशेष मेडिकल टीम का गठन किया गया है। डॉ. सीमा मिश्रा एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं। इस टीम में न्यूरो सर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन और मनोरोग विभागों के डॉक्टर शामिल हैं।
15 दिन से एक महीना तक लग सकता है
एम्स के पूर्व निदेशक और सीताराम भारतीय इंस्टीट्यूट के कंसलटेंट डॉ. एमसी मिश्रा ने बताया कि ऐसे मामलों में हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जाता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन कर कोर्ट को रिपोर्ट देते हैं और उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होती है।
हरीश राणा के मामले में यह कहना मुश्किल है कि उनकी सांसें कब तक चलेंगी। अगर निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो न्यूट्रिशन बंद करने के बाद भी 15 दिन, एक महीना या उससे ज्यादा समय लग सकता है।
और पढ़े  आहट बदलाव की- निजी क्षेत्र में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, 30% महिला निदेशक, सरकारी उपक्रमों से कितना आगे?
  • Related Posts

    ब्रिक्स समिट: टी-3 में बढ़ी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की क्षमता, 11 से 13 तक दिल्ली में व्यावसायिक वाहन नहीं आएंगे

    दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने 18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट के मद्देनजर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 की अंतरराष्ट्रीय यात्री-हैंडलिंग क्षमता बढ़ाई है। टर्मिनल-3 के पियर-सी को 9…

    गांधीनगर में निर्माणाधीन इमारत का हिस्सा गिरा: उप मुख्यमंत्री बोले- सभी श्रमिकों को बचाया गया, 12 को आईं चोटें

    गुजरात के गांधीनगर में एक निर्माणाधीन इमारत का हिस्सा अचानक गिर गया। हादसा कुडासन इलाके में हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और…