दिल्ली में आज कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस ने सरकार के सामने पांच मांगे रखी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, जिसमें केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खरगे ने लिखा कि कांग्रेस के कंधों पर अंग्रेजी राज की तरह एक बार फिर भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की जिम्मेदारी है। जिस तरह अंग्रेजों से लड़कर वोट का हक छीना, उसी तरह आज भी उसी हक को बचाने के लिए लड़ना पड़ रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि जिस मुख्य चुनाव आयुक्त पर उनके अपने साथी भरोसा नहीं कर रहे, उन पर देश कैसे भरोसा कर सकता है? खरगे ने आरोप लगाया कि चुपचाप फॉर्म 6 के नियमों में बदलाव करवा दिया गया, जो पूरी तरह से गैरकानूनी है। नौकरी तो दी नहीं और अब वोट का अधिकार भी छीनना चाहते हैं। खरगे ने आगे कहा, ‘कांग्रेस ने इस देश की संस्थाओं को बनाया और उन्हें अधिकार संपन्न बनाया, लेकिन आज वे ही संस्थाएं सत्ता के आगे सिर झुकाए खड़ी हैं। भाजपा-आरएसएस योजना के तहत ये काम कर रही हैं।’
कांग्रेस ने सरकार के सामने पांच मांगें रखी हैं, जो कि निम्न हैं-
- मतदाता सूची में होने वाले हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक हो।
- जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें पूरी सूचना और अपील का अवसर मिले।
- राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित आवश्यक डेटा आसान फॉर्मेट में समय पर उपलब्ध हो।
- जहां गंभीर विसंगतियों के प्रमाण सामने आएं, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो।
- चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और निर्णयों में खुद ऐसी पारदर्शिता हो कि किसी पक्ष को यह कहने का अवसर न मिले कि जानकारी छिपाई जा रही है।
लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली मतदाता
खरगे ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है। हम इस मुद्दे को किसी चुनाव को जीतने या हारने की लड़ाई के रूप में नहीं देखते। चुनाव तो आते जाते रहते हैं, सरकारें आती-जाती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं। यही भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद है। हमें हर नागरिक से कहना है कि लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति एक आम वोटर है, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या सत्ता में बैठा नेता नहीं।’






