दिल्ली: घर-दफ्तर और बाजार होगा पास, TOD से राजधानी में बदलेगी रोजमर्रा की जिंदगी..

Spread the love

राजधानी में आने वाले समय में कई क्षेत्रों में रोजाना की भागदौड़ और लंबी दूरी तय करने की मजबूरी कम हो सकती है। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी)-2026 पॉलिसी के तहत मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर के आसपास ऐसे इलाकों का विकास किया जा रहा है, जहां घर, दफ्तर और बाजार एक दायरे में होंगे। इससे वॉक-टू-वर्क और वॉक-टू-मार्केट जैसे कॉन्सेप्ट से बड़ा बदलाव आएगा।

 

नई पॉलिसी के तहत मेट्रो और आरआरटीएस स्टेशनों के 500 मीटर दायरे में मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट को प्राथमिकता दी गई है। इसका मतलब है कि आवासीय इमारतों के साथ ऑफिस, दुकानें और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी सुविधाएं उसी इलाके में विकसित होंगी, जिससे लोगों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दिल्ली में द्वारका, रोहिणी-नरेला बेल्ट, पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार और न्यू अशोक नगर जैसे क्षेत्र, साथ ही बाहरी दिल्ली के नरेला, बावाना, मुंडका और नांगलोई क्षेत्र इस मॉडल के लिए सबसे उपयुक्त माने जा रहे हैं।

इन क्षेत्रों में पहले से आवासीय और औद्योगिक या व्यावसायिक गतिविधियों का मिश्रण मौजूद है, जिसे योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर घर के पास काम की अवधारणा को मजबूत किया जा सकता है। दक्षिणी दिल्ली के साकेत, मालवीय नगर और हौज खास जैसे क्षेत्रों में यह मॉडल पहले से आंशिक रूप से मौजूद है, जिसे और बेहतर बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विकास से न केवल ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि लोगों का समय भी बचेगा। इस मॉडल से पैदल चलने की आदत बढ़ेगी और जीवनशैली अधिक सक्रिय होगी। हालांकि, इसके लिए सुरक्षित फुटपाथ, बेहतर स्ट्रीट डिजाइन और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास जरूरी होगा, ताकि यह व्यवस्था व्यवहारिक रूप से सफल हो सके।

लाखों लोगों को मिलेगा फायदा…
दिल्ली में मेट्रो और आरआरटीएस कॉरिडोर के आसपास लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र टीओडी-2026 के तहत कवर किया जा रहा है। यह क्षेत्र राजधानी की घनी आबादी वाले हिस्सों में आता है, जहां लाखों लोग रहते हैं। यदि इस पूरे क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट होता है, तो आने वाले वर्षों में करीब 50 लाख के करीब लोग सीधे तौर पर ‘वॉक-टू-वर्क’ और वॉक-टू-मार्केट मॉडल से लाभान्वित हो सकते हैं। हालांकि, यह संख्या प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन, घनत्व (एफएआर) और नए आवास के विकास की गति पर निर्भर करेगी।

मेट्रो कॉरिडोर के पास सस्ते घरों का सपना होगा साकार
दिल्ली के शहरी ढांचे को आधुनिक बनाने और आम लोगों का मेट्रो कॉरिडोर के नजदीक घर होने का सपना साकार करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। इसके लिए राजधानी में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) पॉलिसी-2026 लागू की जा रही है। यह नीति न केवल दिल्ली में जमीन की किल्लत का ठोस समाधान निकालेगी, बल्कि ऊंची इमारतों और बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए राजधानी को फ्यूचर रेडी ग्लोबल सिटी की कतार में खड़ा कर देगी।

और पढ़े  दिल्लीवालों को रेखा सरकार का तोहफा: अब 1.20 लाख आय वाले भी बनवा सकेंगे राशन कार्ड, 7.71 लाख अपात्र नाम हटे

टीओडी पॉलिसी के तहत मेट्रो, नमो रेल और भारतीय रेलवे के मौजूदा, निर्माणाधीन व प्रस्तावित काॅरिडोर के 500 मीटर के दायरे में आवासीय, व्यावसायिक समेत दूसरी नागरिक सुविधाओं को एकीकृत विकास किया जाएगा। इस मॉडल का मकसद लोगों को कार्य स्थल के करीब घर उपलब्ध कराना, ट्रैफिक दबाव कम करना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के उपयोग को बढ़ावा देना है। ट्रांजिट आधारित इस शहरी योजना में आवास, रोजगार और सुविधाओं को एक ही दायरे में लाने पर जोर दिया गया है।

नई व्यवस्था में अधिकतम एफएआर 500 तक की अनुमति दी गई है, जिसमें 65 फीसदी हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए अनिवार्य होगा। इन आवासीय इकाइयों का आकार 100 वर्गमीटर तक रखा गया है, ताकि ये किफायती बने रहें और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सके। शेष 35 फीसदी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों, दफ्तरों और अन्य सुविधाओं के विकास की अनुमति दी गई है, जिससे क्षेत्र में रोजगार और सेवाओं का विस्तार होगा।

अब बिल्डर्स और डेवलपर्स कम जमीन पर ज्यादा ऊंची और आधुनिक इमारतें बना सकेंगे। पहले इसके लिए कम से कम 1 हेक्टेयर जमीन की जरूरत थी, लेकिन अब मात्र 2000 वर्ग मीटर के छोटे प्लॉट पर भी 500 एफएआर का लाभ मिल सकेगा। कुल निर्माण का 65 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से आवासीय उपयोग के लिए होगा। इसमें बनने वाले फ्लैट्स का साइज 100 वर्ग मीटर से कम रखा जाएगा, ताकि मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग मेट्रो के पास बजट में घर खरीद सकें।

सिंगल विंडो सिस्टम राह करेगा आसान
पॉलिसी में छोटे डेवलपर्स को भी शामिल करने के लिए न्यूनतम प्लॉट साइज को घटाकर 2,000 वर्गमीटर कर दिया गया है, जो पहले एक हेक्टेयर था। इसके अलावा, विभिन्न शुल्कों को मिलाकर एक सिंगल टीओडी चार्ज लागू किया गया है और सभी मंजूरियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की गई है। नई पॉलिसी में लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया गया है, जिसमें से करीब 80 वर्ग किलोमीटर ऐसा इलाका भी शामिल है जो पहले इसके दायरे से बाहर था। इन क्षेत्रों में अनाधिकृत कॉलोनियां, लो-डेंसिटी रिहायशी क्षेत्र और लैंड पूलिंग जोन शामिल हैं।

और पढ़े  दिल्ली-NCR- तीन दिन नहीं घूमेंगे ट्रकों के पहिए: यूनियनों का कल से चक्का जाम, इस फैसले से फूटा गुस्सा

पुरानी पॉलिसी में थीं कई दिक्कतें
पुरानी टीओडी पॉलिसी में कई जटिल शर्तें थीं, जिनकी वजह से इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। पहले कम से कम एक हेक्टेयर जमीन जरूरी थी और अधिक एफएआर का लाभ लेने के लिए आठ हेक्टेयर तक की शर्तें लागू थीं। इससे छोटे डेवलपर्स इसमें शामिल नहीं हो पाते थे। इसके अलावा नोड आधारित सिस्टम, अलग-अलग विभागों से मंजूरी और कई तरह के शुल्कों ने प्रक्रिया को धीमा और जटिल बना दिया था, जिससे प्रोजेक्ट अटकते रहे। नई पॉलिसी में इन कमियों को दूर की गई हैं। कॉरिडोर आधारित मॉडल, छोटे प्लॉट की अनुमति, सिंगल विंडो क्लियरेंस और एकीकृत चार्ज सिस्टम जैसे बदलावों से अब प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी मिलने की उम्मीद है।


Spread the love
  • Related Posts

    बेटी की हत्या के आरोप में पिता गिरफ्तार, पहले से एक बेटी थी दूसरी बेटी होने पर नाखुश था आरोपी

    Spread the love

    Spread the loveदिल्ली में मुकुंदपुर इलाके में पुलिस ने एक बच्ची का शव बरामद किया है। इस मामले में पुलिस ने बच्ची के पिता दीपक को हत्या के आरोप में…


    Spread the love

    US का बड़ा फैसला: रूबियो ने फर्स्ट वीजा फ्रेमवर्क का किया एलान, जानें भारतीयों को क्या होगा फायदा

    Spread the love

    Spread the loveअमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिका फर्स्ट वीजा का एलान किया है। इसके तहत द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत…


    Spread the love