बड़े नेटवर्क का खुलासा: विदेशी कॉल को भारतीय में बदल हो रही थी ठगी, 2 को पुलिस ने किया गिरफ्तार

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राजधानी में साइबर ठगी के एक बड़े और नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जहां विदेशी गिरोह भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहा था। स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने कार्रवाई करते हुए मयूर विहार फेज-3 स्थित जीडी कॉलोनी में चल रहे एक अवैध सिम बॉक्स सेटअप का खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया  कि यह पूरा नेटवर्क कंबोडिया समेत दक्षिण-पूर्व एशिया में बैठे साइबर ठगों से जुड़ा हुआ है, जो दिल्ली में बैठे लोगों के जरिए भारत में अपने ऑपरेशन चला रहे थे। इस मामले में पुलिस ने वैभव राज उर्फ इशु (29 वर्ष) और अनिल कुमार (28 वर्ष), दोनों निवासी घरौली एक्सटेंशन को गिरफ्तार किया है।

 

डीसीपी आईएफएसओ विनीत कुमार ने बताया कि जांच में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज मामलों का विश्लेषण करते हुए पुलिस को इस अवैध सिम बॉक्स गेटवे सेटअप की जानकारी मिली, जो विदेशी वीओआईपी कॉल्स को भारतीय मोबाइल नंबरों में बदलकर इस्तेमाल कर रहा था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक एक्टिव 32 स्लॉट वाला सिम बॉक्स, 350 से अधिक सिम कार्ड, बीएसएनएल के 30 नए सिम, कई मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, फाइबर मॉडेम, इंटरनेट स्प्लिटर और केबल्स, इंडियन ओवरसीज बैंक की चेकबुक समेत कई कूरियर पैकेट बरामद किए हैं।

जांच में सामने आया कि वैभव राज ने अपने नाम पर इंटरनेट कनेक्शन लिया था और वही सिम बॉक्स तथा लैपटॉप ऑपरेट करता था। वह एनीडेस्क एप्लिकेशन से विदेश में बैठे साइबर ठगों को रिमोट एक्सेस उपलब्ध कराता था और उनके निर्देशानुसार लगातार सिम कार्ड बदलता रहता था। वहीं अनिल कुमार ने फ्लैट किराए पर लेकर पूरा सेटअप तैयार किया था और वही पूरे ऑपरेशन का प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय लेन-देन संभाल रहा था। वह बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करता था और सिम कार्ड व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सप्लाई तथा कूरियर हैंडलिंग भी करता था। जांच में एक अन्य हैंडलर की भी पहचान हुई है। वह मुंबई से ऑपरेट कर रहा था फिलहाल उसके बारे में पुलिस पता लगा रही है। 

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फर्जी बैंक खातों में ट्रासंफर करते थे ठगी की रकम
जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी या किराए के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) का इस्तेमाल करते थे। ठगी की रकम इन खातों में डालकर उसे कई लेयर में ट्रांसफर किया जाता था, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। एक ऐसे ही खाते से तीन केस जुड़े मिले हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों, फंड ट्रेल और इंटरनेशनल कनेक्शन की जांच कर रही है। साथ ही SIM कार्ड सप्लाई करने वाले लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

ऐसे करते थे ठगी
इस गिरोह का तरीका बेहद शातिर और सुनियोजित है। ठग पहले विदेश से इंटरनेट कॉल (वीओआईपी) के जरिए संपर्क करते थे, जिसे सिम बॉक्स की मदद से भारतीय मोबाइल नंबर में बदल दिया जाता था, ताकि पीड़ित को लगे कि कॉल देश के अंदर, जैसे दिल्ली या किसी अन्य शहर से ही आ रही है। इसके बाद वे खुद को पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और उनके खिलाफ एफआईआर या गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई का भय पैदा करते थे। जब पीड़ित घबरा जाता था, तो वही ठग डिजिटल अरेस्ट का हवाला देकर उसे पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते थे।

दुबई से जुड़े इंटरनेशनल क्रिप्टो जालसाजी का खुलासा, तीन आरोपी हुए गिरफ्तार
दक्षिणी जिले की नेब सराय थाना पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन जालसाजों गाजियाबाद, यूपी निवासी मोहम्मद अजीम अंसारी, कौसैन परवेज और तनीष जोशी उर्फ सुभान को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल, क्रिप्टो वॉलेट का एक्सेस, ठगी से जुड़े अहम चैट रिकॉर्ड और बेनिफिशियरी वॉलेट की जानकारी बरामद की है। जांच में इनके तार सीधे दुबई में बैठे मास्टरमाइंड हैंडलर से जुड़े पाए गए हैं। दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अनंद मितल ने बताया कि संगम विहार निवासी अब्दुल रहमान के साथ मोहम्मद अजीम अंसारी नाम के व्यक्ति ने 6.10 लाख नकद देने का झांसा देकर उनसे ट्रस्ट वॉलेट के जरिए 6099 क्रिप्टो करेंसी ट्रांसफर करवा ली, लेकिन ट्रांसफर के बाद आरोपी ने पैसे नहीं दिए।

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पाकिस्तान-बांग्लादेश से चल रहा फर्जी लोन ऐप गिरोह पकड़ा, दो गिरफ्तार
दक्षिण पश्चिमी जिले की साइबर पुलिस ने एक बड़े फर्जी लोन ऐप गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के तार पाकिस्तान और बांग्लादेश के वर्चुअल नंबरों से जुड़े हैं। पुलिस इसी मामले में चार अन्य जालसाजों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। गिरोह ज्यादातर पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहा था। जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि ठगी में इस्तेमाल एक बैंक खाते की जांच करते हुए इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक की टीम नेहल बाबू नामक व्यक्ति तक पहुंची थी। इसी कड़ी में आगे 24 वर्षीय करण कुमार और 27 वर्षीय शमी अहमद को गिरफ्तार किया। दोनों दिल्ली के कापसहेड़ा इलाके के रहने वाले हैं और रैपिडो ड्राइवर हैं।


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