Alert: पश्चिम बंगाल में 3 और लोग हुए संक्रमण का शिकार, 10 प्वाइंट्स में निपाह के बारे में जानिए..

श्चिम बंगाल में इन दिनों निपाह वायरस का असर देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तीन अन्य लोगों को निपाह से संक्रमित पाया गया है। इसके साथ अब पश्चिम बंगाल में संक्रमितों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।

पहले जिन दो स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमित पाया गया था, उनका अब भी आईसीयू में इलाज चल रहा है। दोनों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन मरीजों के संपर्क में आए करीब 120 लोगों को ट्रैक किया है। इन्हें होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है।

पश्चिम बंगाल में बढ़ती इस संक्रामक बीमारी ने डॉक्टर्स को अलर्ट कर दिया है। गौरतलब है कि निपाह वायरस के संक्रमण की दर और इससे मृत्यु का खतरा दोनों ही अधिक रहता है। संक्रमण का शिकार रहे 40-70% मरीजों की मौत हो जाती है। इन जोखिमों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है।

 

क्या कहते हैं स्वास्थ्य अधिकारी?

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से, एक अधिकारी ने कहा, संक्रमण के स्रोत का पता लगाना मुश्किल है। यह एक से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाला ट्रांसमिशन हो सकता है या फिर संभव है कि संक्रमण दूषित फलों के माध्यम से फैला हो। मरीजों की राज्य के बाहर की कोई ट्रैवेल हिस्ट्री भी नहीं है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि राज्य के कई प्रवासी मजदूर इस समय के आसपास घर लौटते हैं, तो इससे ट्रांसमिशन का खतरा हो सकता है, फिलहाल ये बीमारी फैल कैसे रही है इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

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वहीं, स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप ने मीडिया को बताया कि हम सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं और प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। निपाह को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से मौतों के बाद झारखंड स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। स्वास्थ्य मंत्री ने सभी जिलों को सख्त निगरानी, त्वरित रिपोर्टिंग और जन-जागरूकता के निर्देश दिए। फिलहाल यहां कोई मरीज नहीं मिला है।

 

कई मामलों में खतरनाक है निपाह का संक्रमण

निपाह वायरस के संक्रमण को कई अध्ययनों में कोरोनावायरस से अधिक खतरनाक बताया जाता रहा है। इससे संक्रमितों की हालत तेजी से बिगड़ती जाती है। गंभीर स्थितियों में आईसीयू और वेंटिलेटर की भी जरूरत हो सकती है। निपाह का संक्रमण फेफड़े और ब्रेन को भी अटैक करता है। कुछ मरीजों में संक्रमण के एन्सेफलाइटिस होने के मामले भी देखे गए हैं।

 

1. निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा जूनोटिक रोग है, जिसका मतलब है कि ये जानवरों से इंसानों में फैलता है। मुख्य रूप से ये चमगादड़ों में पाया जाता है और जब इन चमगादड़ों द्वारा दूषित फल इंसान खा लेते हैं तो इसे संक्रमण का खतरा हो सकता है। चमगादड़ों के लार और मूत्र से दूषित खाद्य पदार्थ भी संक्रमण का कारण हो सकते हैं।

2. निपाह वायरस इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह तेजी से शरीर में फैलकर दिमाग और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। कई मामलों में यह संक्रमण बहुत जल्दी गंभीर रूप ले लेता है, जिससे मरीज की जान को खतरा हो सकता है।

3. निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे होते हैं, जिससे इसे पहचान में देरी हो सकती है। संक्रमितों को तेज बुखार, सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द और उल्टी की शिकायत हो सकती है। शुरुआत में हल्के लगने वाले ये लक्षण तेजी से गंभीर होते जाते हैं।

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4. निपाह वायरस का असर फेफड़ों पर भी पड़ सकता है। संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, तेज खांसी और सीने में जकड़न महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में निमोनिया जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे ऑक्सीजन लेवल गिरने लगता है। इसके साथ ही मरीज को चक्कर आना, भ्रम की स्थिति और बोलने में परेशानी भी हो सकती है।

5. निपाह वायरस की सबसे गंभीर जटिलता एन्सेफेलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन होना है। जब वायरस दिमाग तक पहुंचता है, तो इससे मरीज को दौरे पड़ सकते हैं। इसके अलावा  भ्रम, व्यवहार में बदलाव और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में मरीज कोमा की हालत में भी चला जाता है।

6. मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कुछ मरीजों में संक्रमण ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बनी रहती हैं। जिन स्थानों पर इसका जोखिम रहता है वहां लोगों को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। पिछले साल ये वायरस केरल में भी प्रकोप मचा चुका है।

7. निपाह वायरस की मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है, जो लगभग 40 से 70 प्रतिशत तक हो सकती है। ग्रामीण और कम संसाधन वाले इलाकों, जहां समय पर रोग की पहचान और इलाज नहीं हो पाती है वहां पर खतरा और बढ़ जाता है।

8. फिलहाल निपाह वायरस का कोई विशेष विशेष इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीज का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है, जिसमें बुखार नियंत्रित करना, सांस की मदद और आईसीयू सपोर्ट शामिल है। गंभीर मामलों में वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। समय पर पहचान और सही देखभाल से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है।

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9. निपाह वायरस से बचाव ही सबसे कारगर तरीका है। खुले में रखे फल खाने से बचें और अच्छी तरह धोकर ही फल का सेवन करें। जिन इलाकों में निपाह के मामले सामने आए हों, वहां लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। चमगादड़ों के रहने के स्थान या बीमार जानवरों से दूरी बनाए रखें।

10. निपाह का संक्रमण किसी को भी हो सकता है, हालांकि जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है उनमें रोग का खतरा अधिक हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस की तकलीफ या मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिखें और वह निपाह प्रभावित क्षेत्र में रहा हो, तो तुरंत उससे दूरी बनाए रखें और उसे डॉक्टर के पास भेजें।

नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

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