बड़ा फैसला: औद्योगिक-व्यावसायिक संस्थानों को पेट्रोल पंपों से नहीं मिलेगा तेल, 90 दिनों के लिए लगी रोक

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रकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थान पेट्रोल पंपों से पेट्रोल-डीजल नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी जरूरत का तेल थोक बिक्री केंद्रों से ही लेना होगा। यह पाबंदी 90 दिनों तक लागू रहेगी। सरकार ने यह कदम तेल की बढ़ती मांग को देखते हुए उठाया है।

 

दरअसल, पेट्रोल पंप और थोक बाजार की कीमतों में बड़ा अंतर आ गया है। दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं थोक ग्राहकों के लिए इसकी कीमत 134.50 रुपये है। इस भारी अंतर की वजह से बड़े ग्राहक पेट्रोल पंपों से तेल खरीदने लगे थे। इससे देश के कुछ हिस्सों में डीजल की मांग असामान्य रूप से बढ़ गई थी।

सरकारी तेल कंपनियों ने आम लोगों को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोल पंपों पर दाम स्थिर रखे हैं। पश्चिम एशिया के संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हुआ है। टेलीकॉम टावर और बिजली बनाने वाली कंपनियों जैसे थोक ग्राहकों को बाजार की पूरी कीमत चुकानी पड़ती है। इसी वजह से वे सस्ता तेल लेने के लिए पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे।

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को नया आदेश जारी किया। इस आदेश का नाम ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026’ है। सरकार ने कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी तनाव से तेल की सप्लाई और जहाजों के आने-जाने पर बुरा असर पड़ा है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

नए नियमों के मुताबिक, पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री केवल वाहनों की टंकी या मान्यता प्राप्त कंटेनरों में ही होगी। एक ग्राहक या वाहन एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही खरीद पाएगा। इस तेल को दोबारा बेचना पूरी तरह मना है। सरकार का मानना है कि बड़े ग्राहकों की भीड़ से आम जनता के लिए तेल की कमी हो सकती है। इससे जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

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तेल कंपनियों और राज्य सरकारों को इन नियमों को सख्ती से लागू करने को कहा गया है। जमाखोरी, कालाबाजारी और तेल की हेराफेरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। यह कार्रवाई ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत की जाएगी। सरकार जरूरत पड़ने पर किसी खास ग्राहक या क्षेत्र को इन नियमों से छूट दे सकती है। यह पाबंदी 90 दिनों के बाद फिर से बढ़ाई जा सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर में तेल की सही और बराबर सप्लाई सुनिश्चित करना है।


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