ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का अभियान समाप्त हो गया है। भारत ने इन खेलों में 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदकों के साथ कुल 39 पदक अपने नाम किए। भारत ने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा के बाद चौथा स्थान हासिल किया है। भारत राष्ट्रमंडल खेल के अंतिम दिन रविवार को कोई पदक नहीं जीत सका। इस वैश्विक आयोजन के अंतिम दिन ट्रैक साइकिलिंग और जूडो में भारतीय खिलाड़ी चुनौती पेश करने उतरे थे, लेकिन पोडियम तक पहुंचने में सफल नहीं रहे।
भारतीय समयानुसार देर रात आयोजित समापन समारोह में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कॉटलैंड में आयोजित क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान ऋषभ रिखीराम, शंकर महादेवन जैसे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया।
| रैंक | देश | स्वर्ण | रजत | कांस्य | कुल पदक | कुल पदकों के आधार पर ओवरऑल रैंक |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ऑस्ट्रेलिया | 70 | 45 | 56 | 171 | 1 |
| 2 | इंग्लैंड | 29 | 45 | 36 | 110 | 2 |
| 3 | कनाडा | 19 | 20 | 23 | 62 | 3 |
| 4 | भारत | 13 | 17 | 9 | 39 | 4 |
| 5 | स्कॉटलैंड (मेजबान देश) | 13 | 9 | 17 | 39 | 4 |
| 6 | न्यूजीलैंड | 10 | 14 | 12 | 36 | 6 |
| 7 | नाइजीरिया | 10 | 7 | 7 | 24 | 9 |
| 8 | जमैका | 10 | 4 | 5 | 19 | 10 |
| 9 | वेल्स | 9 | 10 | 12 | 31 | 7 |
| 10 | मलयेशिया | 8 | 3 | 5 | 16 | 11 |
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों का समापन समारोह भारतीय समयानुसार रात 1:30 बजे से हुआ। मौजूदा विश्व चैंपियन और दो बार की पदक विजेता मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया रविवार देर रात ग्लास्गो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह में भारतीय दल की ध्वजवाहक बनीं। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह के दौरान खेलों की मेजबानी का औपचारिक ‘हैंडओवर’ भारत को किया गया। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भी समारोह के दौरान मौजूद रहे। ग्लास्गो स्थित द हाइड्रो में आयोजित समापन समारोह के ‘हैंडओवर सेगमेंट’ में भारत की समृद्ध संस्कृति और राष्ट्रमंडल परिवार के साथ साझा मूल्यों को प्रदर्शित किया गया। ‘हैंडओवर सेगमेंट’ के तीन चरणों में दर्शकों को साझा मूल्यों, संस्कृति और आपसी जुड़ाव की यात्रा से रूबरू कराया गया।अहमदाबाद में 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स शताब्दी संस्करण
2030 के राष्ट्रमंडल खेल की मेजबानी के तैयार भारत ने दुनिया को ग्लास्गो से 2030 में अहमदाबाद पधारने का निमंत्रण दिया। क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान हुई प्रस्तुति में प्राचीन दर्शन, समकालीन कला और सांस्कृतिक भव्यता का अद्भुत मिश्रण देखा गया। प्रिंस एडवर्ड, ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग ने किंग चार्ल्स III का प्रतिनिधित्व करते हुए खेलों के समापन की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने प्रतिभागियों और मेजबान शहर ग्लास्गो के निवासियों से कहा, आपने जिस तरह से प्रतिस्पर्धा की, अधिकारियों का काम किया, समर्थन किया और खेलों का आयोजन किया, उसके लिए धन्यवाद। आपने आज रात एक बार फिर राष्ट्रमंडल की भावना और मूल्यों को जीवंत किया है। ग्लासगो, धन्यवाद।’ प्रिंस एडवर्ड ने सभी देशों और क्षेत्रों के एथलीट्स से कहा कि चार साल बाद अहमदाबाद में मुलाकात होगी। यह 24वें राष्ट्रमंडल खेलों का शताब्दी संस्करण होगा।भारत की प्रस्तुति और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’
भारतीय दल की प्रस्तुति तीन खंडों में सामने आई। इसका मुख्य संदेश प्राचीन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ पर आधारित था, जिसका अर्थ है पूरा विश्व एक परिवार है। यह विषय राष्ट्रमंडल के एकता और मित्रता के आदर्शों से दृढ़ता की भावना के अनुरुप है। पहले खंड में भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का भी स्मरण किया गया। अभिनेत्री मानुषी छिल्लर के नेतृत्व में एक व्यापक कोरियोग्राफी प्रस्तुत की गई। डिजिटल दृश्यों के बीच सैकड़ों नर्तकों ने भारत की विविधता का जीवंत चित्रण किया। संगीतकार-गायक शंकर महादेवन के प्रेरक संगीत ने ऑर्केस्ट्रल भव्यता को भारतीय संगीत परंपराओं के साथ जोड़ा। इस प्रस्तुति ने भारत को एक ऐसी सभ्यता के रूप में दर्शाया जो भाषाओं, रीति-रिवाजों और कलात्मक परंपराओं की बहुलता के माध्यम से दुनिया का स्वागत करती है।
स्कॉटलैंड में गुजरात का जिक्र और डेविड डिक्सन पुरस्कार
- गुजराती पार्श्व गायिका भूमि त्रिवेदी ने मेजबान राज्य पर आधारित विशेष प्रस्तुति भी दी।
- स्कॉटिश संगीत, कविता और नृत्य की प्रस्तुतियों ने भी ध्यान खींचा।
- स्कॉटलैंड की व्हीलचेयर धावक मेलानी वुड्स को खेलों में उनकी भागीदारी के लिए डेविड डिक्सन पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार राष्ट्रमंडल खेलों के उत्कृष्ट खिलाड़ी को उनके प्रदर्शन, निष्पक्ष खेल और टीम में समग्र योगदान के आधार पर दिया जाता है।
पूरी दुनिया ने देखा अहमदाबाद का परिचय
एक विशेष फिल्म के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को गुजरात के अहमदाबाद से परिचित कराया। इसमें खेल को भारतीय जीवन का एक अविभाज्य अंग बताया गया। गुजरात को एक ऐसे स्थान के रूप में चित्रित किया गया जहां सदियों पुरानी विरासत नवाचार और शहरी महत्वाकांक्षा के साथ मिलती है। इसमें यह संदेश भी दिया गया कि खेल में लोगों को एकजुट करने की शक्ति है। यह विविधता का सम्मान करता है और राष्ट्रमंडल को भारत में एक साथ लाता है।
सांस्कृतिक जुगलबंदी और संगीतमय समापन
समापन समारोह के दौरान हुई प्रस्तुति को “द कल्चरल जुगलबंदी” कहा गया, जिसमें भारतीय सितार कलाकार ऋषभ शर्मा को स्कॉटिश संगीतकार रॉस आइंस्ली के साथ जोड़ा गया। शर्मा के सितार और आइंस्ली के स्कॉटिश पाइप्स व व्हिसल्स के बीच का संवाद दो प्राचीन संगीत परंपराओं के बीच एक प्रतीकात्मक बातचीत बन गया। यह प्रस्तुति ध्यानपूर्ण अंशों और ऊर्जावान उत्साहपूर्ण संगीत के बीच सहजता से आगे बढ़ी। इसने प्रदर्शित किया कि संगीत सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करते हुए भूगोल और भाषा से परे कैसे जा सकता है। समापन भारत के सबसे प्रसिद्ध संगीत परिवारों में से एक का था। शंकर महादेवन अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम महादेवन के साथ मंच पर लौटे। उन्होंने भारत के कुछ सबसे पहचाने जाने वाले गीतों का संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इनमें “सुनो गौर से दुनिया वालों, भाग मिल्खा, ऐ वतन वतन और लहरा दो” शामिल रहे।
भारत को राष्ट्रमंडल खेलों के अंतिम दिन जूडो, ट्रैक साइकिलिंग और पैरा साइकिलिंग में पदक आने की उम्मीद थी। जूडोका ईशरूप नारंग कांस्य पदक लाने से चूक गईं। ईशरूप का महिला 78 किग्रा के कांस्य पदक मुकाबले में कनाडा की कोरोली गॉडबाउट से सामना हुआ। ईशरूप हालांकि, भारत के खाते में एक और पदक नहीं जोड़ सकीं। अंतिम दिन जूडो में भारत की ओर से ईशरूप के अलावा अवतार सिंह और यश घंघास भी चुनौती पेश करने उतरे थे। अवतार और यश शुरुआती दौर में ही बाहर हो गए थे, जबकि ईशरूप ने रेपचेज के जरिये कांस्य पदक मुकाबले में जगह बनाई थी।ट्रैक साइकिलिंग स्पर्धा में हर्षवीर सिंह सेखों और दिनेश कुमार ने पुरुषों की 40 किमी प्वाइंट्स रेस में हिस्सा लिया, जबकि रोनाल्डो सिंह लैतोंजाम पुरुषों की 1000 मीटर टाइम ट्रायल स्पर्धा में चुनौती पेश करते हुए नजर आए। दोनों ही इवेंट में भारतीय राइडर्स का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। हर्षवीर सिंह सेखों और दिनेश कुमार क्वालिफाइंग दौर में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद प्रतियोगिता से बाहर हो गए। भारतीय साइकिलिस्ट रोनाल्डो सिंह लैतोंजाम पुरुषों की 1000 मीटर टाइम ट्रायल स्पर्धा में 20वें स्थान पर रहे। रोनाल्डो ने 1000 मीटर टाइम ट्रायल में एक मिनट 4.191 सेकेंड का समय निकाला और 20वां स्थान हासिल किया।
अंतिम दिन कोई पदक नहीं मिलने से इतर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में खास बात यह रही कि इस बार भारत ने कुश्ती, बैडमिंटन और हॉकी जैसे अपने मजबूत खेलों के बिना भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। मुक्केबाजी में रिकॉर्ड सात स्वर्ण, जूडो में पहली बार दो स्वर्ण और एथलेटिक्स में कई ऐतिहासिक उपलब्धियों ने भारत के अभियान को यादगार बना दिया। भारत की सबसे बड़ी सफलता मुक्केबाजी में रही जिसमें कुल 10 पदक आए। जूडो में अस्मिता डे और हर्ष सिंह भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता बने। यामिनी मौर्य ने रजत और उन्नति शर्मा ने कांस्य जीतकर भारत को इस खेल में रिकॉर्ड चार पदक दिलाए। एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने 5000 मीटर में कांस्य जीतकर इतिहास रचा। वह एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स के दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। इससे पहले वह 10,000 मीटर में रजत जीत चुके थे। वहीं प्रवीण चित्रावेल ने ट्रिपल जंप में रजत और सेल्वा प्रभु ने कांस्य पदक जीता। पैरा एथलेटिक्स में सोमन राणा ने पुरुष F57 शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का खाता और मजबूत किया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक हासिल किया। इससे पहले शर्मिला धनखड़ और दिलीप महादू गावित भी स्वर्ण जीत चुके हैं।
भारत के सभी पदक विजेता (39 पदक): 13 स्वर्ण, 17 रजत, 9 कांस्य
| क्रम | खिलाड़ी | स्पर्धा | खेल | पदक |
|---|---|---|---|---|
| 1 | झंडू कुमार | पुरुष हेवीवेट | पैरा पावरलिफ्टिंग | कांस्य |
| 2 | ऋषिकांत सिंह | पुरुष 60 किग्रा | भारोत्तोलन | रजत |
| 3 | मीराबाई चानू | महिला 48 किग्रा | भारोत्तोलन | स्वर्ण |
| 4 | राजा मुथुपांडी | पुरुष 65 किग्रा | भारोत्तोलन | रजत |
| 5 | ज्ञानेश्वरी यादव | महिला 53 किग्रा | भारोत्तोलन | रजत |
| 6 | बिंदियारानी देवी | महिला 58 किग्रा | भारोत्तोलन | कांस्य |
| 7 | शर्मिला धनखड़ | महिला शॉटपुट F57 | पैरा एथलेटिक्स | स्वर्ण |
| 8 | सरवेश कुशारे | पुरुष हाई जंप | एथलेटिक्स | रजत |
| 9 | शिल्पा के. शायला | महिला शॉटपुट F57 | पैरा एथलेटिक्स | कांस्य |
| 10 | वल्लुरी अजया बाबू | पुरुष 79 किग्रा | भारोत्तोलन | रजत |
| 11 | हरजिंदर कौर | महिला 69 किग्रा | भारोत्तोलन | रजत |
| 12 | गुलवीर सिंह | पुरुष 10,000 मीटर | एथलेटिक्स | रजत |
| 13 | मुरली श्रीशंकर | पुरुष लंबी कूद | एथलेटिक्स | रजत |
| 14 | दिलीप महादू गावित | पुरुष 100 मीटर T47 | पैरा एथलेटिक्स | स्वर्ण |
| 15 | मोहम्मद बासिल | पुरुष 100 मीटर T47 | पैरा एथलेटिक्स | रजत |
| 16 | लवप्रीत सिंह | पुरुष +110 किग्रा | भारोत्तोलन | रजत |
| 17 | सीमा कालीरामना | महिला डिस्कस थ्रो | एथलेटिक्स | कांस्य |
| 18 | अस्मिता डे | महिला 48 किग्रा | जूडो | स्वर्ण |
| 19 | हर्ष सिंह | पुरुष 60 किग्रा | जूडो | स्वर्ण |
| 20 | यामिनी मौर्य | महिला 57 किग्रा | जूडो | रजत |
| 21 | नीरज चोपड़ा | पुरुष भालाफेंक | एथलेटिक्स | रजत |
| 22 | यशवीर सिंह | पुरुष भालाफेंक | एथलेटिक्स | कांस्य |
| 23 | तेजस्विन शंकर | पुरुष डेकाथलॉन | एथलेटिक्स | कांस्य |
| 24 | प्रीति पवार | महिला 54 किग्रा | मुक्केबाजी | स्वर्ण |
| 25 | जैस्मिन लंबोरिया | महिला 57 किग्रा | मुक्केबाजी | स्वर्ण |
| 26 | प्रवीण चित्रावेल | पुरुष ट्रिपल जंप | एथलेटिक्स | रजत |
| 27 | सेल्वा प्रभु तिरुमरन | पुरुष ट्रिपल जंप | एथलेटिक्स | कांस्य |
| 28 | जादूमणि सिंह | पुरुष 55 किग्रा | मुक्केबाजी | रजत |
| 29 | सोमन राणा | पुरुष शॉटपुट F57 | पैरा एथलेटिक्स | स्वर्ण |
| 30 | शुभम जुयाल | पुरुष शॉटपुट F57 | पैरा एथलेटिक्स | रजत |
| 31 | गुलवीर सिंह | पुरुष 5000 मीटर | एथलेटिक्स | कांस्य |
| 32 | साक्षी चौधरी | महिला 51 किग्रा | मुक्केबाजी | स्वर्ण |
| 33 | अरुंधति चौधरी | महिला 70 किग्रा | मुक्केबाजी | स्वर्ण |
| 34 | प्रिया घंघास | महिला 60 किग्रा | मुक्केबाजी | स्वर्ण |
| 35 | सचिन सिवाच | पुरुष 60 किग्रा | मुक्केबाजी | स्वर्ण |
| 36 | अंकुश | पुरुष 70 किग्रा | मुक्केबाजी | स्वर्ण |
| 37 | लवलीना बोरगोहेन | महिला 75 किग्रा | मुक्केबाजी | रजत |
| 38 | नरेंद्र बेरवाल | पुरुष +90 किग्रा | मुक्केबाजी | रजत |
| 39 | उन्नति शर्मा | महिला 63 किग्रा | जूडो | कांस्य |
खेलवार भारत का प्रदर्शन
| खेल | स्वर्ण | रजत | कांस्य | कुल |
|---|---|---|---|---|
| भारोत्तोलन | 1 | 6 | 1 | 8 |
| एथलेटिक्स | 0 | 5 | 5 | 10 |
| पैरा एथलेटिक्स | 3 | 2 | 1 | 6 |
| पैरा पावरलिफ्टिंग | 0 | 0 | 1 | 1 |
| जूडो | 2 | 1 | 1 | 4 |
| मुक्केबाजी | 7 | 3 | 0 | 10 |
| कुल | 13 | 17 | 9 | 39 |








