अफसर करते रह गए दिशा-निर्देश का इंतजार,पिंजरे में कैद गुलदार की पिंजरे में ही हो गई मौत

गढ़वाल वन प्रभाग के दीवा रेंज मुख्यालय धुमाकोट में 22 दिन से कैद गुलदार ने पिंजरे में ही दम तोड़ दिया। दरअसल, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्लूआईआई) की रिपोर्ट में सैंपल न मिलने (मिसमैच) की पुष्टि हुई थी। जिसके बाद वन विभाग के अधिकारी गुलदार को रेस्क्यू सेंटर भेजने या फिर जंगल में छोड़ने के निर्देश मांगते रह गए लेकिन उच्चाधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। आला अफसरों की लापरवाही ने गुलदार की जान ले ली।

27 जून को नैनीडांडा के सल्ड महादेव क्षेत्र के बणासी गांव में वृद्धा सुशीला देवी (65) पत्नी स्व.अनूप सिंह को गुलदार ने मार डाला था। घटना के बाद वन विभाग की टीम ने घटनास्थल से महिला के शव के पास से सैंपल लेकर डब्लूआईआई भेजे। इस बीच 3 जुलाई की रात को एक नर गुलदार घटनास्थल के पास लगे पिंजरे में कैद हो गया। गुलदार को धुमाकोट स्थित रेंज मुख्यालय में शिफ्ट कर उसके सैंपल भी मिलान के लिए डब्लूआईआई भेजे गए थे। इसी बीच डब्लूआईआई की रिपोर्ट में सैंपलों का मिलान नहीं हुआ।

 

लदार पिंजरे में संघर्ष था कर रहा
ऐसी स्थिति में डीएफओ गढ़वाल ने उच्चाधिकारियों से पिंजरे में कैद गुलदार को रेस्क्यू सेंटर भेजने या फिर जंगल में छोड़ने के लिए दिशा-निर्देश मांगे। इधर आला अफसरों के दिशा-निर्देश का इंतजार होता रहा, उधर गुलदार पिंजरे में ही संघर्ष करता रहा। आखिरकार 25 जुलाई को उसने पिंजरे में ही दम तोड़ दिया।

 

डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव का कहना है कि गुलदार पिंजरे में संघर्ष कर रहा था। उसने अपने को चोटिल कर लिया। उसका उपचार भी कराया गया लेकिन वह बच नहीं सका। वहीं, रेंज अधिकारी सुभाष घिल्डियाल ने बताया कि सोमवार को दो पशु चिकित्सकों के पैनल से गुलदार का पोस्टमार्टम कर विसरा सुरक्षित रख दिया। इसके बाद गुलदार के शव को नष्ट कर दिया गया।

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आक्रामक था गुलदार, ज्यादा दिन तक पिंजरे में नहीं रखा जा सकता था

बणासी गांव से पकड़ा गया नर गुलदार 8 से 10 वर्ष के बीच का था। उसे धुमाकोट रेंज मुख्यालय में रखा गया था। चिकित्सकों ने जब 6 जुलाई को उसका मेडिकल परीक्षण किया था तब वह एकदम स्वस्थ था लेकिन वह काफी आक्रामक भी था। पशु चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा था कि उसे ज्यादा दिन तक पिंजरे में कैद नहीं रखा जा सकता।

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