महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने 65 वर्षीय एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर आरोप था कि उसने 10 साल की एक बच्ची के साथ तीन साल तक लगातार यौन शोषण किया, जिससे वह गर्भवती हो गई थी। कल्याण कोर्ट के विशेष न्यायाधीश लक्ष्मीकांत ए. बिडवई ने शुक्रवार को कहा कि दोषी उत्तम निकलजे, जो एक रिहायशी सोसाइटी में चौकीदार का काम करता था, उसने कई साल तक पूरी तरह सोच-समझकर और शांत दिमाग से इस अपराध को अंजाम दिया।
यह मामला 20 फरवरी, 2020 को तब सामने आया, जब क्रांतिनगर में कचरा उठाने वाली टीम को एक डस्टबिन के पास काले कपड़े में लिपटा एक मृत नवजात शिशु मिला। इसके बाद मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान पता चला कि बच्ची को पेट में तेज दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद उसे एक क्लिनिक और डायग्नोस्टिक सेंटर ले जाया गया, जहां उसका गर्भपात हो गया। पीड़िता ने अपने माता-पिता को अपनी आपबीती बताई, जिसके बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस’ (पॉक्सो) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
अदालत ने कहा कि आरोपी ने कई साल तक पूरी तरह सोच-समझकर और शांत दिमाग से इस अपराध को अंजाम दिया। अदालत ने यह भी गौर किया कि विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहने के दौरान आरोपी गंभीर बीमारियों से पीड़ित था और उसे अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा था। अदालत ने कहा, ‘यह मामला ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) मामलों की श्रेणी में नहीं आता है; इसलिए इसमें मौत की सजा देना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में, आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा देना ही न्यायसंगत और सही होगा। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पॉक्सो अधिनियम की धारा छह के तहत आजीवन कारावास का अर्थ आरोपी के शेष प्राकृतिक जीवन भर के लिए कारावास होगा।’







