राममंदिर के चढ़ावे में गबन-  बेहिसाब चढ़ावा, असीमित गबन, भाग रहे जिम्मेदार, अब 200 करोड़ के घपले की चर्चा

राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों के गबन के मामले की तफ्तीश सोमवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने शुरू कर दी। टीम ने मंदिर परिसर में बने ट्रस्ट के कार्यालय पहुंचकर दान राशि के रिकॉर्ड कब्जे में लिए। पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ की और ट्रस्ट के पदाधिकारियों से बातचीत कर दान राशि की गिनती संबंधी प्रक्रिया जानी। रात तक जारी शुरुआती जांच एसआईटी को कई साक्ष्य मिले हैं।

शासन ने शनिवार को ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। टीम में शामिल लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन दोपहर करीब दो बजे अयोध्या पहुंचे। उन्होंने शहर के प्रमुख अधिकारियों से मुलाकात की। इसके बाद दोपहर 2:50 बजे मंदिर परिसर पहुंचे। वहां वे सीधे ट्रस्ट के दफ्तर के भीतर गए और जानकारी जुटाई।

कई सवालों के जवाब नहीं दे सके ट्रस्ट के पदाधिकारी
एसआईटी के साथ मंडलायुक्त, डीएम और एसएसपी भी मंदिर परिसर पहुंचे। ट्रस्ट के मुख्य पदाधिकारी भी दफ्तर में मौजूद रहे। शाम करीब पौने छह बजे ट्रस्ट के पदाधिकारी गोपाल राव मंदिर परिसर से बाहर निकलकर चले गए। करीब एक घंटे बाद मंदिर परिसर पहुंचकर ट्रस्ट के दफ्तर पहुंचे।

 

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने उनसे कुछ दस्तावेज मांगे थे, जिन्हें लेने के लिए वे गए थे। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी के कई सवालों के स्पष्ट जवाब ट्रस्ट के पदाधिकारी नहीं दे सके। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के लिए बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों को भी बुलाया गया। एसआईटी ने पूछा कि बैंक ने किन कर्मियों को गिनती में लगा रखा था और उनकी भर्ती किस तरह की गई थी। उनका मुख्य कार्य क्या था?

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कब्जे में लिए सीसीटीवी फुटेज
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने घटना से संबंधित कई सीसीटीवी फुटेज देखे। उन्हें साक्ष्य के तौर पर कब्जे में भी लिया। मामले के खुलासे के बारे में भी जाना। टीम ने यह भी देखा कि दान पात्र कितने हैं, वे कहां-कहां रखे हैं, गिनती से पहले उन्हें किस कमरे में ले जाया जाता है, फिर गिनती किस तरह की जाती है और उसका रिकॉर्ड कहां तथा कैसे सुरक्षित रखा जाता है।

 

सही जवाब तलाशना एसआईटी के लिए चुनौती
मामले में अधिकांश जानकारी ट्रस्ट के जरिये ही एसआईटी को मिलेगी, जबकि ट्रस्ट के कई पदाधिकारी व उनसे जुड़े लोग पहले से ही सवालों के घेरे में हैं। ऐसे में पूरी और सही जानकारी हासिल करना भी एसआईटी के लिए चुनौती से कम नहीं होगा।

 

पदाधिकारियों पर सवाल
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावे में हेरफेर और गबन का मामले में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं। कुछ पर सीधे आरोप हैं, जबकि कई की लापरवाही उजागर हुई है। यह सब उनकी नाक के नीचे हुआ, लेकिन उन्हें भनक तक नहीं लगी। अब सवाल उठ रहा है कि इन पदाधिकारियों के रहते निष्पक्ष जांच कैसे संभव होगी। ट्रस्ट के पदाधिकारी शक्तिशाली और ऊंची पहुंच वाले बताए जा रहे हैं।

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे कई पदाधिकारी मंदिर की व्यवस्थाओं और चढ़ावे की गिनती के लिए जिम्मेदार हैं। इसके बावजूद चढ़ावे की रकम का गबन होना कई प्रश्न खड़े करता है। घटना उजागर होने के बाद से सभी जिम्मेदार पदाधिकारी खामोश हैं। किसी भी पदाधिकारी ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

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जांच में चुनौतियां
एसआईटी के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों से सवाल-जवाब करना आसान नहीं होगा। जिन लोगों पर सीधे आरोप हैं, वे भी किसी पदाधिकारी या उनके करीबियों से जुड़े हैं। एसआईटी के सामने जांच में कई बड़ी चुनौतियां हैं।

 

गबन की रकम पर चर्चा
मामले में पांच संदिग्धों को पकड़ा गया था। उनकी निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं। अंदेशा है कि करोड़ों रुपये इधर-उधर खपाए भी गए होंगे। कुछ दिन पहले गबन की रकम आठ करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही थी।

 

अब यह सैकड़ों करोड़ रुपये होने की चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर गबन की रकम दो सौ करोड़ रुपये तक होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आंकड़ों के संबंध में कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। लिहाजा, इन चर्चाओं की पुष्टि संभव नहीं है। एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बेहिसाब चढ़ावा, असीमित गबन… भाग रहे जिम्मेदार
गबन का अंदाजा लगाना आसान नहीं है। इसकी कई वजहें हैं। दरअसल, चढ़ावे का हिसाब लगाने के लिए ही गिनती की जाती थी। मतलब उसके पहले ये राशि बेहिसाब होती थी। उसी दौरान उसमें से रकम पार की जाती थी। आखिर में जोड़-घटा कर विवरण दर्ज कर दिया जाता था। जो विवरण दर्ज हो गया, वही हिसाब हो गया। इसलिए गबन कितने करोड़ का हुआ, यह स्पष्ट करना कठिन है। अब बड़े जिम्मेदार इधर-उधर भाग रहे हैं।

मंदिर के चढ़ावे का हिसाब-किताब रोजाना होता था। रोज के चढ़ावे में छोटी से लेकर बड़ी रकम व सोना-चांदी भी होता है। आम दिनों की अपेक्षा त्योहार, वीकेंड में राशि में कई गुना बढ़ोतरी होती है। गिनती करने से पहले सभी दानपात्र खोले जाते थे। पूरी रकम एक जगह इकट्ठा की जाती थी। तब तक यह पता नहीं रहता था कि किस दानपात्र में कितनी और रकम है। इसी के लिए गिनती होती थी, लेकिन उसी दौरान रकम पार की जाती रही।
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कुंभ की तरह माघ मेले के दौरान भी बेशुमार चढ़ावा
पिछले साल हुए कुंभ में करीब 67 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे थे। इसमें से करोड़ों लोग अयोध्या भी दर्शन करने आए। सूत्र बताते हैं कि उस दौरान चढ़ावे की राशि में बेशुमार वृद्धि हुई थी। इसका फायदा उठाते हुए चढ़ावा चोरों ने एक-एक दिन में 10 से 15 लाख रुपये तक पार किए। यही नहीं, इसी तरह का खेल माघ मेले के दौरान भी हुआ। तब भी श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ था। उस दौरान भी हर दिन मोटी रकम गिनती के दौरान पार की गई।
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