चढ़ावे में हेरफेर व गबन के मामले में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी सवालों के घेरे में हैं। कई पर सीधे आरोप हैं तो कइयों की लापरवाही उजागर हुई है। जिनकी नाक के नीचे ये सब हुआ और उनको भनक तक नहीं लगी। अब सवाल है कि ट्रस्ट में इनके रहते हुए क्या निष्पक्ष जांच मुमकिन है। क्योंकि ट्रस्ट के पदाधिकारी पॉवरफुल और ऊंची पहुंच वाले भी हैं।
ट्रस्ट में कई बड़े पदाधिकारी हैं, जिनकी जिम्मेदारी मंदिर की व्यवस्थाओं से लेकर चढ़ावे की राशि की गिनती कराने तक रहती है। इसमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव समेत कई पदाधिकारी शामिल हैं। इसके बावजूद चढ़ावे की रकम का गबन होना कई सवाल खड़े कर रहा है। जिम्मेदार भी सवालों के घेरे में हैं। ये सभी जिम्मेदार घटना के उजागर होने के बाद से खामोश हैं। एक भी पदाधिकारी की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
अब सवाल है कि जिन पर सवाल हैं, क्या उनके रहते एसआईटी निष्पक्षता से जांच कर पाएगी। क्योंकि ट्रस्ट के पदाधिकारियों से सवाल-जवाब करना इतना आसान नहीं होगा। वहीं जिन लोगों पर सीधे आरोप हैं, वे भी कहीं न कहीं किसी पदाधिकारी या उनके करीबी लोगों से जुड़े हुए हैं। एसआईटी के सामने इस तरह की कई बड़ी चुनौतियां भी हैं।
सोशल मीडिया पर 200 करोड़ रुपये तक की चर्चा
मामले में पांच संदिग्ध पकड़े गए थे। उनकी निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। अंदेशा है कि करोड़ों रुपये इधर-उधर खपाए भी गए। कुछ दिन पहले गबन की गई रकम आठ करोड़ से अधिक बताई जा रही थी। अब तो यह सैकड़ों करोड़ रुपये होने की चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर दो सौ करोड़ रुपये तक होने की बात कही जा रही है। हालांकि, आंकड़ों के संबंध में कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। लिहाजा इसकी पुष्टि संभव नहीं है। एसआईटी की जांच के बाद ही कुछ स्पष्ट हो सकेगा।
जेवरात भी बड़ी मात्रा में गायब !
सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे की राशि के साथ चढ़ावे के जेवरात भी गायब किए गए हैं। इसमें करोड़ों का सोना-चांदी शामिल है। यही नहीं, एक चर्चा यह भी है कि दो किलो की सोने की गदा भी गायब है। अब यह बात कितनी सही है, इसका अभी तक पता नहीं है। क्योंकि कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
दोषियों के साथ खामियों की भी पड़ताल : नृपेंद्र मिश्र
अब मामले की जांच तेज गति से आगे बढ़ेगी और दोषियों के साथ-साथ व्यवस्था की खामियों की भी पड़ताल होगी। इस पूरे घटनाक्रम ने मंदिर प्रशासन को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया था, जिसे “क्रॉस सड़क” कहा जा सकता है, लेकिन अब लक्ष्य भविष्य की ओर बढ़ते हुए श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत करना है।
माफ नहीं करेंगे, सब जेल जाएंगे : विनय कटियार
मामले से बहुत बड़ा दर्द हुआ है, चोरों को माफ नहीं करेंगे। सबको ठीक करेंगे। ये सब जेल जाएंगे। छोड़ा नहीं जाएगा। राम मंदिर के ट्रस्टी भी जांच के दायरे में हैं, किसी को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए। सब की जांच हो रही है। एसएसपी इन लोगों के हाथों में हथकड़ी लगाएंगे। ऐसी कार्रवाई होगी जो आने वाले दिनों में मिसाल बनेगी।
भगवान अपने पैसे को ढूंढ लेंगे : इकबाल
बाबरी मस्जिद के पूर्व पैरोकार इकबाल अंसारी ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने एसआईटी पर भरोसा जताते हुए कहा कि जांच पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से होनी चाहिए तथा दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। भगवान का पैसा कहीं नहीं जाएगा, भगवान स्वयं अपने पैसे को ढूंढ लेंगे। कथित रूप से धन कहां गया, किस तरह गड़बड़ी हुई और इसमें कौन लोग शामिल हैं, इसकी गहन जांच होनी चाहिए।
बैंक ने दिया कंपनी को ठेका, ट्रस्ट ने तय किए थे कर्मचारी
मंदिर के चढ़ावे की रकम पार करने के पीछे तमाम लापरवाही और खेल हैं। दरअसल, बैंक ने कर्मचारियों को एक कंपनी के जरिये आउटसोर्सिंग पर रखा था। इसमें खेल ये किया गया कि ट्रस्ट ने जो कर्मचारी तय किए, आउटसोर्सिंग पर वही लोग रखे गए। ये लोग या तो किसी पदाधिकारी के रिश्तेदार थे या परिचित। मंदिर व्यवस्था में चढ़ावे की राशि की गिनती प्रक्रिया मुख्य कार्यों में से एक है जिसकी जिम्मेदारी ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों, बैंककर्मियों की तय की गई थी। या ये कहा जाए कि चढ़ावा चोरों को हाथ साफ करने का पूरा मौका दिया गया। न निगरानी की गई, न कर्मचारियों का सत्यापन और न ही उनकी कोई जामा तलाशी की जाती थी। चूंकि कर्मचारी ट्रस्ट की तरफ से रखे गए थे, इसलिए बैंक अधिकारियों की हिम्मत ही नहीं हुई कि वह इस पर सवाल उठा सकें। दूसरा पहलू ये भी है कि इसमें बैंक की भी भूमिका संदिग्ध है। उनके कर्मचारियों या अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा से भी खिलवाड़
परिसर की सुरक्षा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात हैं। इसलिए मंदिर की सुरक्षा पुख्ता रहती है। वहीं ट्रस्ट के कर्मचारी गले में आईकार्ड लटकाकर हर जगह घूमते हैं। वहीं कहीं भी आ जा सकते हैं। उनकी तलाशी नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक, टिन्नू व अन्य लोगों ने ऐसे 50 से अधिक कर्मी रखे हैं।
कम पैसों में कर रहे थे काम
अब तक जिनके पास से रकम बरामद हुई, वह सभी 12 से 18 हजार रुपये प्रति माह पर काम कर रहे थे। दिन से लेकर रात तक ये सभी मंदिर में ही रहते थे। इतने कम वेतन में इतना लंबा काम करने के पीछे की वजह अब समझ आ रही है।
जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित हेराफेरी, चोरी और अनियमितताओं को लेकर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक पत्र याचिका भेजी गई है। वकील अनूप प्रकाश अवस्थी ने यह याचिका भेजी है। इस पत्र याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह मंदिर के दान में हुई कथित हेराफेरी की जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज करने और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी स्वतंत्र एजेंसी से अदालत की निगरानी में जांच कराने का निर्देश देने पर विचार करे। याचिका में श्रद्धालुओं के योगदान को सुरक्षित रखने और मंदिर के कोष के संग्रह, लेखा-जोखा, रखरखाव और वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक निरंतर न्यायिक निगरानी तंत्र बनाने की भी मांग की गई है।
कुंभ की तरह माघ मेले के दौरान भी बेशुमार चढ़ावा
पिछले साल हुए कुंभ में करीब 67 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे थे। इसमें से करोड़ों लोग अयोध्या भी दर्शन करने आए। सूत्र बताते हैं कि उस दौरान चढ़ावे की राशि में बेशुमार वृद्धि हुई थी। इसका फायदा उठाते हुए चढ़ावा चोरों ने एक-एक दिन में 10 से 15 लाख रुपये तक पार किए। यही नहीं, इसी तरह का खेल माघ मेले के दौरान भी हुआ। तब भी श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ था। उस दौरान भी हर दिन मोटी रकम गिनती के दौरान पार की गई।







