मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में पुरुषोत्तम मास के अंतिम पर्व पर श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। विश्व शांति, मानव कल्याण और समस्त सृष्टि के मंगल की कामना के साथ आयोजित 25 दिवसीय श्री विष्णु महायज्ञ का समापन मां सरयू के पावन तट पर अत्यंत भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूर्व सांसद लल्लू सिंह तथा श्री संकट मोचन हनुमान किला के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास ने मां सरयू का पूजन-अर्चन कर विश्वकल्याण और शांति का संदेश दिया।
कच्चा घाट पर आयोजित समापन समारोह में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मां सरयू का विधि-विधान से दुग्धाभिषेक किया गया। इसके बाद भव्य सरयू आरती उतारी गई, जिसमें संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों और हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आरती के पश्चात मां सरयू को 1100 मीटर लंबी चुनरी और 251 किलोग्राम पुष्पों से निर्मित विशाल माला अर्पित की गई। चुनरी अर्पण के दौरान पूरा सरयू तट जय श्रीराम और हर-हर महादेव के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
इस अवसर पर पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि मां सरयू केवल अयोध्या की जीवनरेखा नहीं, बल्कि सनातन आस्था की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पहचान भगवान श्रीराम और मां सरयू से है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था मां सरयू से जुड़ी हुई है और उनकी कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व के कई देशों में अशांति, युद्ध और तनाव का वातावरण है, तब अयोध्या से विश्व शांति, सद्भाव और मानव कल्याण का संदेश देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा लोगों को संस्कार और संस्कृति से जोड़ने का कार्य होता है।
श्री संकट मोचन हनुमान किला के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास ने कहा कि पुरुषोत्तम मास सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और दुर्लभ माना गया है। लगभग तीन वर्ष में एक बार आने वाला यह पवित्र मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस अवधि में किए गए जप, तप, दान, यज्ञ तथा धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष फल प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से 25 दिवसीय श्री विष्णु महायज्ञ का आयोजन किया गया था, जिसमें प्रतिदिन वैदिक अनुष्ठान, यज्ञ, कथा, भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचनों के माध्यम से लोगों को धर्म एवं संस्कृति के प्रति जागरूक किया गया।
महंत परशुराम दास ने कहा कि मां सरयू के तट पर आयोजित यह महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और मानवता के कल्याण का एक बड़ा संकल्प है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति हमेशा “वसुधैव कुटुंबकम्” का संदेश देती रही है और इसी भावना के साथ महायज्ञ का आयोजन किया गया।
समापन समारोह में मुख्य यजमान राम कुमार पाल, डॉ. एम.पी. यादव, ललित यादव, अनुपम मिश्रा, दारा सिंह यादव, मनोज यादव, भाजपा जिला मंत्री बबलू सिंह, कुंदन सिंह, धर्मेंद्र यादव, भूगुल यादव सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु, मातृशक्ति और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मां सरयू की महाआरती और विश्व शांति की सामूहिक प्रार्थना के साथ महायज्ञ का विधिवत समापन हुआ।
सरयू तट पर आयोजित इस दिव्य आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अयोध्या केवल आस्था की नगरी ही नहीं, बल्कि विश्व को शांति, सद्भाव और मानवता का मार्ग दिखाने वाली आध्यात्मिक राजधानी भी है। मां सरयू को अर्पित 1100 मीटर लंबी चुनरी और 251 किलोग्राम पुष्पमाला इस आयोजन की भव्यता और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक बन गई।







