नगर निगम के 15 वार्डों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण परियोजना तय समय सीमा से पिछड़ गई है। 828 लाख रुपये की लागत से बनने वाले 70 आंगनबाड़ी केंद्रों को जून तक पूरा किया जाना था, लेकिन अभी भी कई भवन अधूरे पड़े हैं।
परियोजना की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि छह आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए अभी तक जमीन ही उपलब्ध नहीं हो सकी है। कई स्थानों पर निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। 18 भवन ऐसे हैं, जहां अभी छत डालने का काम बाकी है, जबकि 36 केंद्र निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं।
शहर के अनेक वार्डों में आंगनबाड़ी केंद्र वर्षों से किराए के भवनों, सामुदायिक परिसरों या छोटे कमरों में संचालित हो रहे हैं। जगह की कमी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव का असर बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और पोषण सेवाओं पर पड़ता रहा है। नए भवन बनने के बाद बच्चों को सुरक्षित वातावरण, खेल सामग्री, पोषण आहार और स्वास्थ्य सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की योजना है।
निर्माण कार्य की धीमी प्रगति और भूमि संबंधी अड़चनों ने परियोजना की समयसीमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जून का लक्ष्य नजदीक होने के बावजूद कई केंद्र अभी अधूरे हैं। अपर नगर आयुक्त भारत ने बताया कि जिन स्थानों पर भूमि उपलब्ध है, वहां तेजी से निर्माण कराया जा रहा है। बाकी केंद्रों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है, जिससे सभी भवनों का निर्माण जल्द पूरा कराया जा सके।








