भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में सनातन धर्म के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज के संकल्प, दूरदर्शी सोच और अथक प्रयासों से अयोध्या में भगवान श्री विट्ठल का प्रथम भव्य मंदिर साकार हुआ है। लगभग ढाई से तीन वर्षों की सतत साधना और निर्माण कार्य के बाद तैयार हुए इस दिव्य मंदिर में 24 जुलाई से भगवान श्री विट्ठल के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ हुआ, जो 27 जुलाई तक वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न होगा।
पूरे आयोजन का संचालन जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज के सान्निध्य और मार्गदर्शन में हो रहा है। दक्षिण भारत से पधारे विद्वान वैदिक आचार्य एवं पंडित वेद मंत्रों के मध्य प्राण-प्रतिष्ठा के सभी अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं। मंदिर परिसर में यज्ञ, हवन, पूजन, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।
इस अवसर पर जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान विट्ठल केवल किसी एक क्षेत्र के आराध्य नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन समाज की आस्था के केंद्र हैं। उनका उद्देश्य था कि जो श्रद्धालु महाराष्ट्र या दक्षिण भारत नहीं जा पाते, उन्हें अयोध्या में ही भगवान विट्ठल के दिव्य दर्शन का अवसर प्राप्त हो। यह मंदिर उत्तर और दक्षिण भारत की वैष्णव परंपराओं के आध्यात्मिक समन्वय का सशक्त प्रतीक बनेगा।
महोत्सव में अयोध्या के संत-महात्मा, विभिन्न मठ-मंदिरों के महंत, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। सभी अतिथियों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया जा रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान श्रीराम की नगरी में भगवान विट्ठल का यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बनेगा।
इस पावन अनुष्ठान के यजमान विष्णु दास मालू एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती विमला मालू पूरे श्रद्धाभाव से सभी धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बने हुए हैं।
संयोजक रमेश कुमार मिश्र ‘शिब्बू’ ने बताया कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास, भोजन, प्रसाद, पेयजल, चिकित्सा और विश्राम सहित सभी आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है। आयोजन समिति का उद्देश्य है कि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के भगवान विट्ठल के दर्शन कर सके।
व्यवस्थापक राघवेंद्र मिश्रा ‘अप्पू’ ने बताया कि मंदिर की देखरेख से लेकर संपूर्ण आयोजन की व्यवस्थाओं पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। आयोजन में किसी भी प्रकार की कमी न रहे, इसके लिए पूरी टीम सेवा-भाव से निरंतर कार्य कर रही है।
मनोज कुमार तिवारी सहित अनेक सेवाभावी कार्यकर्ता महोत्सव को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
27 जुलाई तक चलने वाले इस प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रतिदिन वैदिक अनुष्ठान, यज्ञ-हवन, संत प्रवचन, भजन-कीर्तन और भगवान विट्ठल के दिव्य दर्शन का क्रम जारी रहेगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज द्वारा स्थापित यह मंदिर अयोध्या की धार्मिक पहचान में एक नई गरिमा जोड़ते हुए देश-विदेश से आने वाले लाखों भक्तों के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बनेगा।







