बेटे को मृत दिखाकर LIC से हड़पे 72.15 लाख रुपये, 17 साल बाद खुला राज, पिता सहित 5 पर केस दर्ज

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गरा में युवक की हत्या के बाद बेटे की माैत बताकर फर्जी बीमा दावा पेशकर पिता ने एलआईसी से 72 लाख रुपये का बीमा क्लेम हड़प लिया। इस फर्जीवाड़े में गाजियाबाद में मुकदमा दर्ज किया गया है। बीमा कंपनी के विधिक प्रबंधक ने सिहानी गेट थाने में पिता-पुत्र सहित पांच आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। बीमा कराने वाले के पिता ने बेटे को मृतक बताकर फर्जीवाड़ा किया, जबकि आरोपियों ने एक अर्धविछिप्त युवक की हत्या की थी। आगरा में बीते वर्ष जनवरी में ही हत्याकांड का मुकदमा दर्ज किया गया था।

एसीपी नंदग्राम उपासना पांडेय ने बताया कि सिहानी क्षेत्र स्थित भारतीय जीवन बीमा निगम के विधिक प्रबंधक के मुताबिक गौतमबुद्धनगर के भट्ठा पारसौल निवासी अनिल सिंह ने वर्ष 2003 से 2006 तक चार बीमा पॉलिसी कराई। बाद में विजयपाल सिंह ने 2006 में बीमा कंपनी को सूचित किया कि उनके बेटे अनिल की आगरा में सड़क हादसे में जलकर मौत हो गई है। इसके बाद बीमा कंपनी ने करीब 72 लाख रुपये का भुगतान मृतक के पिता विजयपाल सिंह को कर दिया।

 

इस मामले में 2023 में अहमदाबाद पुलिस ने एक फर्जीवाड़े में अनिल सिंह को गिरफ्तार किया तब उसकी हत्या की झूठी कहानी का पता चला। अहमदाबाद पुलिस की सूचना पर आगरा के रकाबगंज थाने में युवक की हत्या का केस दर्ज किया गया।

जांच में सामने आया कि अनिल सिंह की मौत हुई ही नहीं थी। 30 जुलाई 2006 को विजयपाल सिंह, उनके बेटे अभय सिंह, अनिल सिंह उर्फ गुड्डू और महिपाल व रामवीर सिंह ने ट्रेवल्स में नुकसान होने पर योजना बनाई। इसके बाद अनिल सिंह ने अपने पिता और भाई के साथ मिलकर एक अर्द्धविक्षिप्त युवक को खाना खिलाने के बहाने बुलाया। खाना खिलाकर युवक को अनिल सिंह के कपड़े पहनाए और नशीली दवा पिलाकर कार की ड्राइविंग सीट पर बैठा दिया। आरोपियों ने आगरा स्थित पीडब्ल्यूडी कार्यालय के नजदीक कार पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी और अनिल की जलकर मौत होने की अफवाह फैला दी।

कार से शव निकालकर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। यह पूरी साजिश बीमा राशि हड़पने के लिए रची गई थी। अहमदाबाद पुलिस ने एक फर्जीवाड़े में अनिल सिंह उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार किया तो वर्ष 2006 में रची गई माैत की झूठी कहानी का खुलासा हुआ।

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भारतीय जीवन बीमा निगम के विधिक प्रबंधक ने विजयपाल सिंह, अनिल सिंह, अभय सिंह और महिपाल सिंह व रामवीर सिंह निवासी भट्ठा पारसौल के खिलाफ सिहानी गेट थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। एसीपी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

नाम बदलकर गुजरात में बनाया था ठिकाना
हत्याकांड के बाद अनिल आराम से गुजरात के अहमदाबाद में नाम बदलकर रह रहा था। अहमदाबाद पुलिस को गोपनीय सूचना मिली थी कि अनिल मलिक जिंदा है। वह नाम राजकुमार चौधरी रखकर निकौल क्षेत्र में रह रहा है। अपराध शाखा के अधिकारियों ने छानबीन के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया था।

अनिल ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2004 में बीमा पाॅलिसी ली थी। बाद में कार खरीदी। वर्ष 2006 में आगरा आए और ट्रेन में भीख मांगने वाले व्यक्ति को खाना खिलाने के बहाने अपने साथ होटल में ले गए। भोजन में नशीला पदार्थ मिला दिया। भिखारी के बेहोश होने पर उसे कार में बैठा दिया। इसके बाद कार की खंभे से टक्कर कराई और उसमें आग लगा दी।

शव की पहचान पिता विजय पाल सिंह ने बेटे के रूप में की थी। बीमा राशि से अपना हिस्सा लेने के बाद अनिल अहमदाबाद में रह रहा था। वह पैतृक गांव नहीं जाता था। उसने बदले हुए नाम से ही चालक लाइसेंस और आधार कार्ड भी बनवाया। उसने ऑटो रिक्शा और कार भी खरीद ली।

कॉलेज पहुंचकर की थी जांच
अनिल मलिक के पिता विजयपाल सिंह और भाई गाजियाबाद में रह रहे थे। कुछ दिन से अनिल भाइयों और दोस्तों के संपर्क में था। पुलिस अनिल को लेकर पारसौल के इंटर कॉलेज में पहुंची थी। अनिल ने 8वीं तक की पढ़ाई पारसौल के किसान इंटर कॉलेज में की थी। रिकॉर्ड में उसका नाम अनिल मलिक ही पाया गया था। इंटर कॉलेज में रिकॉर्ड की पुष्टि करने और आवश्यक प्रमाण पत्र ले जाने के बाद अहमदाबाद पुलिस उसे अपने साथ ले गई थी।

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आखिर किसकी हुई थी हत्या, अब तक नहीं चला पता
रकाबगंज क्षेत्र में हत्या के बाद जिस घटना को हादसा दर्शाया गया, उसमें मरने वाला कौन था? यह आज तक पता नहीं चल सका है। जब आरोपी अनिल के पिता ने मृतक को अपना बेटा बताया तो किसी को कोई शक नहीं हुआ था। मरने वाला व्यक्ति भिखारी था, इसलिए उसकी भी जानकारी नहीं लग सकी। हादसे का केस थाना रकाबगंज में दर्ज हुआ था।


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