साढ़े तीन लाख शिक्षक और कर्मचारियों को कैशलेस इलाज देने की प्रक्रिया शुरू, कर्मचारियों को देनी होगी डिटेल

प्रदेश के शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के लिए बड़ी सुविधा देने की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार जल्द ही “मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना” शुरू करने जा रही है। योजना के तहत पात्र शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके लिए बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल का बीटा वर्जन फिलहाल परीक्षण के दौर से गुजर रहा है।

 

पात्र कर्मचारियों का डेटा एकत्र किया जा रहा
स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज़) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि योजना के औपचारिक शुभारंभ से पहले विभाग पात्र कर्मचारियों का डेटा एकत्र करने और उसे त्रुटिरहित बनाने में जुटी है। पूर्व में कई मामलों में उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड में नाम, जन्मतिथि, आधार अथवा पारिवारिक विवरण में अंतर होने के कारण कार्ड जारी होने की प्रक्रिया प्रभावित होती थी। ऐसे मामलों में आवेदन लंबित रह जाते थे। इसी समस्या को दूर करने के लिए इस बार डेटा सैनेटाइजेशन पर विशेष जोर दिया गया है।

 

इलाज का खर्च निर्धारित सीमा तक सीधे योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा
साचीज़ द्वारा विकसित डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से कर्मचारियों और उनके आश्रितों का विवरण एकरूप प्रारूप में जुटाया जा रहा है। अब तक 3.5 लाख से अधिक पात्र कर्मचारियों का डेटा संकलित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि डेटा शुद्ध होने से कार्ड निर्गत करने की प्रक्रिया तेज होगी और अधिक से अधिक लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सकेगा। योजना के तहत जारी होने वाले मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा कार्ड के माध्यम से लाभार्थी सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार करा सकेंगे। इलाज का खर्च निर्धारित सीमा तक सीधे योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को गंभीर बीमारी या आकस्मिक चिकित्सा खर्च के समय आर्थिक दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि पोर्टल के परीक्षण के दौरान कार्ड निर्माण, लाभार्थी सत्यापन, अस्पतालों से समन्वय और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है। परीक्षण सफल होने के बाद योजना का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। योगी सरकार का मानना है कि योजना लागू होने के बाद प्रदेश के लाखों शिक्षक, कर्मचारी और उनके परिवार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसानी से पहुंच बना सकेंगे तथा इलाज पर होने वाले बड़े खर्च से उन्हें राहत मिलेगी।

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