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पूर्णिया : सभी प्रखंड में विषहरी माता मनसा पूजा धूमधाम के साथ मनाया गया

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पूर्णिया जिला के सभी प्रखंड में विषहरी माता मनसा पूजा धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कसबा प्रखंड के सब्दलपुर ,कुल्लाखास,सझेली,मलहरिया, लखना,बोचगांव,घोड़दौड, बरेटा,गुरही, बनैली,सधुवैली,मोहनी ,भभरा लागन सहित नगर परिषद कसबा के कई इलाकों में मां मनसा की पूजा हुई। कई जगहों में मां मनसा की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।मंगलवार को देर रात पूजा अर्चना की गई एवं बुधवार सुबह में बकरे की बली दी गई।कसबा प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांव में मंगलवार को बिषहरी माता मनसा पूजा को लेकर उत्सव माहौल थी। मंदिरों में माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जा रही है। वहीं घरों पर भी माता का कलश स्थापना कर निर्जला उपवास में रहकर माता की पूजा अर्चना की गई। मंदिरों से शाम को जय ढाक,कांसर के साथ जल यात्रा निकाली गई। जलाशयों से पवित्र जल, कलश धूप,दीप, शंखध्वनि के साथ मंदिर लाई गई। मंदिर में कलश स्थापना के बाद बिषहरी माता मनसा की पूजा अर्चना हुई। मां से मन्नतें मांगी गई। देर शाम को मंदिर परिसर में मनसा मंगल संकीर्तन का आयोजन किया गया।सब्दलपुर महलदार टोल में धूमधाम के साथ मनसा की पूजा की गई।सब्दलपुर इलाके के विभिन्न गांवों में मनसा पूजा की धूम रही।

क्या कहते है पुजारी महावीर दास-
महीने की शुरुआत में मां मनसा की पूजा बिहार,बंगाल और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में घर- घर की जाती है। लोग मां मनसा की प्रतिमा को सिर में उठाकर घर लाते हैं। उसे स्थापित कर उसकी पूजा अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है, कि जो भक्त भक्ति में लीन होकर माता मनसा की पूजा अर्चना करते हैं। उनका सर्प दोष, विवाह से संबंधित दोष और संतान दोष मां मनसा दूर कर देती हैं। यह भी शास्त्रों में उल्लेख है कि मां मनसा बासुकी जी की बहन है। यह बहन उन्हें शिव के आशीर्वाद से मिला था। मां मनसा की पूजा के समय संध्या काल में जो उनके साथ नामों का जाप करते हैं। उन्हें असीम और अलौकिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। यह सात नाम जगत गौरी, जगत कारू, वैष्णवी, शिवयोगिनी, नागेश्वरी, बिषहरी, आस्तिक माता और शैवी है। शास्त्रों में ऐसा भी उल्लेख है की हजारों साल पहले धरती पर मनुष्य की तुलना में सांपों की संख्या अधिक थी। इसके बाद ऋषि कश्यप से लोगों ने एक ऐसी कन्या के लिए तपस्या किया, जो सब के बिषों को हर ले। मनसा पूजा सूर्यास्त के समय गोधूलि बेला में लोग करते हैं।इसके लिए पीतल के पात्र में जल, लाल और पीले फूल दीप प्रज्वलन के साथ धरती के प्रतीक के रूप में लाल और पीले फल माता मनसा को लोग समर्पित करते हैं। जो पूरे भक्ति भाव से तीन,नौ, 11,51 अथवा 108 बार मां मनसा को स्मरण कर उनके मूल मंत्र ऊं ह्रीं ऋं क्लिं एं मनसा दैव्यै नमः का जाप करते हैं। उन्हें मां मनसा सांपों और बिष के भय से मुक्त कर देते हैं। भक्तों की दुविधा को दूर कर उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। दुखों को दूर कर देती हैं। ।

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