राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब गुरुवार को जारी की। नई किताब में कई नई चीजें जोड़ी गई हैं। इनमें आपातकाल, चुनाव आयोग और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों को शामिल किया गया। इसके साथ ही मनुस्मृति के एक श्लोक का भी इसमें उल्लेख किया गया है।
इस बार एनसीईआरटी ने क्या बदलवा किया है?
एनसीईआरटी ने 2026-27 सत्र के लिए कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब गुरुवार को जारी की। पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट-1’ में कई नई चीजें शामिल की गई हैं।
- किताब में आपतकाल का एक अलग खंड शामिल किया गया है।
- भारतीय ज्ञान परंपरा के बारे में कक्षा नौ के छात्र पढ़ेंगे। इसमें उन्हें वेदों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
- चुनाव आयोग और एसआईआर के बारे में भी इस किताब में बताया गया है।
- किताब में महिला सशक्तिकरण का भी खंड जोड़ा गया है। इसमें मनुस्मृति के श्लोक के जरिए महिलाओं की स्थिति के बारे में बताया गया है।
इन मसलों पर किताब में क्या लिखा है?
ऊपर बताए गए चारों बिंदुओं पर किताब में क्या लिखा गया है। आइए बारी-बारी से जानते हैं…
आपातकाल
1975-77 के बीच देश में लगे आपातकाल पर किताब में एक अलग खंड है। किताब में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। इसमें लिखा गया है कि बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और सरकार के खिलाफ असंतोष के बीच जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया था। इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और बिहार-गुजरात में हुए जन आंदोलनों का भी उल्लेख है। साथ ही बताया गया है कि 1977 में इमरजेंसी समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में जनता ने मतदान के जरिए सत्ता परिवर्तन किया, जिसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।
हालांकि, ये पहली बार नहीं है जब एनसीईआरटी की किताब में आपातकाल को शामिल किया गया है। 2007 में पहली बार सीबीएसई के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया गया था। तब यह विषय कक्षा 12वीं की किताब में जोड़ा गया था। उस वक्त कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी।
वेद और महिलाओं के बारे में
इसमें छात्र भारतीय ज्ञान परंपरा के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद व अथर्ववेद के बारे में पढ़ेंगे। इस अध्याय में बताया गया है कि वैदिक काल में महिलाओं की समाज में बहुत उच्च दर्जा और इज्जत थी। महिलाएं विद्वतापूर्ण शिक्षा में शामिल होती थीं, कुछ खास मौकों पर पुरुषों के साथ मिलकर धार्मिक अनुष्ठान करती थीं और सार्वजनिक सभाओं में भाग लेती थीं। साथ ही, ऋग्वेद के कई भजन पारंपरिक रूप से महिला ऋषियों जैसे अपाला, विश्ववारा, घोषा और लोपामुद्रा से जुड़े माने जाते हैं। महिलाओं के सम्मान की परंपरा वैदिक काल के बाद रचे गए ग्रंथों में भी दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, मनुस्मृति में इसका उल्लेख है। इसके बाद मनुस्मृति के एक श्लोक का जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता प्रसन्न रहते हैं। हालांकि, पुस्तक यह भी स्पष्ट करती है कि समय के साथ सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण महिलाओं की स्थिति में उतार-चढ़ाव आया और कई मामलों में उनका दर्जा कमजोर हुआ।
2. मुगलकाल से जुड़े इतिहास के अध्याय में किए बदलाव
जुलाई 2025 में भी मुगलकाल से लेकर शिवाजी तक को लेकर इतिहास की किताबों में कुछ बदलाव किए गए। इसके अलावा दिल्ली सल्तनत से जुड़े इतिहास को बर्बर करार देने के साथ मुगल काल में बाबर, अकबर और औरंगजेब के शासनकाल को खास तौर पर असहिष्णु करार देते हुए इन्हें क्रूरता से जोड़ा गया था। हालांकि, किताब में एक दिशा-निर्देश भी जोड़ा गया था, जिसमें कहा गया है कि इतिहास के काले अध्याय को बिना किसी दुराग्रह के पढ़ा जाना जरूरी है, वह भी आज के समय में किसी को दोष दिए बिना, ताकि इतिहास की गलतियों को सुधारा जा सके और एक ऐसे भविष्ट की परिकल्पना की जा सके, जिसमें ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।
3. संवेदनशील विषयों को पाठ्यक्रम से हटाया गया
2024 में एनसीईआरटी ने राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से बाबरी मस्जिद, गुजरात दंगे और अल्पसंख्यकों जैसे संवेदनशील विषयों को हटा दिया। पाठ्यपुस्तक से बाबरी मस्जिद, गुजरात दंगे और अल्पसंख्यकों जैसे संवेदनशील विषयों को हटाना शामिल रहा। एनसीईआरटी की पाठ्यक्रम मसौदा समिति द्वारा तैयार किए गए परिवर्तनों का विवरण देने वाले एक दस्तावेज के अनुसार, राम जन्मभूमि आंदोलन के संदर्भों को राजनीति में नवीनतम बदलावों के अनुसार बदला गया है। इसके अलावा 2002 के गोधरा दंगों से जुड़े विषय में भी बदलाव किया गया है।
4. मुगलकाल से शीत युद्ध तक, कई अध्याय हटाए गए
अप्रैल 2023 में एनसीईआरटी ने कक्षा 10, 11 और 12 की कई पाठ्यपुस्तकों में बड़े बदलाव किए थे। सबसे ज्यादा चर्चा कक्षा 12 की इतिहास पुस्तक से मुगल साम्राज्य, अकबरनामा, बादशाहनामा, मुगल दरबार और शाही प्रशासन से जुड़े अध्याय हटाने को लेकर हुई थी। इसके अलावा राजनीति विज्ञान की पुस्तकों से ‘राइज ऑफ पॉपुलर मूवमेंट्स’, ‘एरा ऑफ वन पार्टी डोमिनेंस’, ‘कोल्ड वॉर एरा’ और ‘अमेरिकी वर्चस्व’ जैसे अध्याय भी हटा दिए गए थे। एनसीईआरटी ने कहा था कि ये बदलाव नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम को अद्यतन करने और दोहराव वाले विषयों को हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।





